पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >कला >पाकिस्तान Print | Share This  

अलविदा शहंशाह-ए-ग़ज़ल

अलविदा शहंशाह-ए-ग़ज़ल

कराची. 13 जनवरी 2012

मेहदी हसन


शहंशाह-ए-ग़ज़ल मेहदी हसन का क्या निधन हो गया है? कम से कम आगा खान अस्पताल के कुछ अनाधिकृत सूत्रों का तो यही कहना है. लगातार विरोधी खबरों के बीच अभी तक उनके परिजनों ने इस बारे में कोई सूचना नहीं जाहिर की है. हालांकि संगीत की यह महानतम आवाज़ लंबे समय से ही खामोश रही है. पिछले 12 सालों से गले के कैंसर से लड़ने वाले 84 बरस के मेहदी हसन को मंगलवार की रात सांस लेने में तकलीफ के बाद आगा खान अस्पताल में भर्ती कराया गया.

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के लूणा गांव में 18 जुलाई 1927 को जन्में मेहदी हसन का परिवार संगीतकारों का परिवार रहा है. मेहदी हसन के अनुसार कलावंत घराने में वे उनसे पहले की 15 पीढ़ियां भी संगीत से ही जुड़ी हुई थीं. संगीत की आरंभिक शिक्षा उन्होंने अपने पिता उस्ताद अजीम खान और चाचा उस्ताद ईस्माइल खान से ली. दोनों ही ध्रुपद के अच्छे जानकार थे. भारत-पाक बंटवारे के बाद उनका परिवार पाकिस्तान चला गया. वहां उन्होंने कुछ दिनों तक एक साइकिल दुकान में काम की और बाद में मोटर मेकैनिक का भी काम उन्होंने किया. लेकिन संगीत को लेकर जो जुनून उनके मन में था, वह कम नहीं हुआ.

वह दौर उस्ताद बरकत अली, बेगम अख्तर, मुख्तार बेगम जैसों का था, जिसमें मेहदी हसन के लिये अपनी जगह बना पाना सरल नहीं था. एक गायक के तौर पर उन्हें पहली बार 1957 में रेडियो पाकिस्तान में बतौर ठुमरी गायक पहचान मिली. उसके बाद मेहदी हसन ने मुड़ कर नहीं देखा. फिर तो फिल्मी गीतों और गजलों की दुनिया में वो छा गये.

1957 से 1999 तक सक्रिय रहे मेहदी हसन ने गले के कैंसर के बाद पिछले 12 सालों से गाना लगभग छोड़ दिया था. उनकी अंतिम रिकार्डिंग 2010 में सरहदें नाम से आयी, जिसमें फ़रहत शहज़ाद की लिखी "तेरा मिलना बहुत अच्छा लगे है" की रिकार्डिंग उन्होंने 2009 में पाकिस्तान में की और उस ट्रेक को सुनकर 2010 में लता मंगेशकर ने अपनी रिकार्डिंग मुंबई में की. इस तरह यह युगल अलबम तैयार हुआ.

नौ लड़के और पांच लड़कियों के पिता मेहदी हसन को गायकी के लिये दुनिया भर में कई सम्मान मिले. हजारों ग़ज़लें उन्होंने गाईं, जिनके हजारों अलबम दुनिया के अलग-अलग देशों में जारी हुये. पिछले 40 साल से भी अधिक समय से गूंजती शहंशाह-ए-ग़ज़ल की आवाज की विरासत अब बची हुई है.

अपडेट
कराची. 13 जनवरी 2012 16: 14 ist
झूठी है निधन की खबर
मेहदी हसन को लेकर आने वाली तरह-तरह की अफवाहों के बीच उनके बेटे ने बताया है कि मेहदी हसन साहब की तबीयत धीरे-धीरे सुधर रही है. डाक्टरों ने भी उनकी हालत को लेकर कहा कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद से उनकी स्थिति में सुधार हुआ है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Valmiki Ddharm Das Atwal [valmiki.d.atwal@gmail.com] Beawar, Ajmer Rajasthan India - 2015-04-09 12:52:30

 
  mehadi hasan shab ko kisi bhi samman ki aavshykta nahi hai kyon ki samman shabd hi chota hai, ve to dilo ke raja hai aur raja ko koi bhi khitab nahi de sakata hai, ve delo main basane wale ashi ratan hai, hum sab bhartiye aapko salam karte hai mehdi sahab. aap na to pakistani hai na bhartiya aap to sacche Mahamanav hai, jo poore vishva ke hai. aapko shardha suman arpit karte hai. 
   
 

Bhairu Bharti Goswami [] Balwara, Rajasthan - 2013-12-07 06:07:42

 
  मेहदी हसन साहब को भारत रत्न बिल्कुल मिलना चाहिए, क्योंकि उनके पाकिस्तान से ज्यादा फैन भारत में हैं, और उनका जन्म भी भारत में हुआ था. 
   
 

Sanjeev Sinha [sanjeev_delhi@gmail.com] Delhi - 2012-02-11 12:11:01

 
  आपने सही कहा पूजा जी. मेहदी साहब को तो भारत रत्न दिया ही जाना चाहिये. 
   
 

pooja [] raipur - 2012-01-13 06:27:17

 
  मेहदी हसन को सुनें. फिर बताएं क्यों नहीं उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए.  
   
सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in