पहला पन्ना >राजनीति >पाकिस्तान Print | Share This  

हमारी गलती की सजा लोकतंत्र को नहीं-गिलानी

हमारी गलती की सजा लोकतंत्र को नहीं-गिलानी

इस्लामाबाद. 13 जनवरी 2012

यूसुफ रजा गिलानी


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने कहा है कि किसी ने अगर गलती की है तो उसकी कीमत लोकतंत्र को नहीं चुकाना चाहिये. पाकिस्तान की असेंबली में अपना बयान देते हुये गिलानी ने कहा कि अदालत को मुझ पर भरोसा रखना चाहिये.

गौरतलब है कि हाल ही में पाकिस्तानी उच्चतम न्यायालय ने यूसुफ रजा गिलानी की इमानदारी पर सवाल खड़े करते हुये कहा था कि गिलानी को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दायर करने को कहा था. लेकिन अदालत के आदेश के बाद भी गिलानी ने ऐसा नहीं किया. अदालत ने कहा कि गिलानी भ्रष्ट हैं. अदालत की टिप्पणी के बाद से ही राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की सेना के साथ तना-तनी की खबरें आ रही हैं.

शुक्रवार को इन्हीं सब मुद्दों पर नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुये प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा कि जब कौओं की जमात पर शामत आती है, तो वे भी इकट्ठा हो जाते हैं और हम तो संसद सदस्य हैं. हम सबको अपनी एकता बनाए रखनी होगी. अदालत को मुझ पर यकीन होना चाहिए. लोगों की गलतियों की कीमत लोकतंत्र को मत चुकाने दीजिए.

उन्होंने कहा कि यह असेंबली को तय करना है कि आप लोकतंत्र चाहते हैं या तानाशाही. हमें सेना से सरकार को बचाने के लिए विपक्ष के सहयोग की जरूरत नहीं है. विपक्ष सोच सकता है कि हम यहां एनआरओ से बचने के लिए आए हैं. हम यहां इसके लिए नहीं आए हैं. संविधान ऐसा दस्तावेज है, जिसका सभी को सम्मान करना चाहिए. गिलानी ने कहा कि मैं सेना या सुप्रीम कोर्ट के साथ किसी तरह का टकराव नहीं चाहता हूं. संसद ने मुझे सर्वसम्मति से चुना है और देश को खुद को बचाने के लिए सेना की जरूरत नहीं है. हम यहां शहीद बनने के लिए नहीं आए हैं.

गिलानी ने सैन्य तख्तापलट की अटकलों के बीच सेना प्रमुख कयानी पर इशारों में निशाना साधते हुए कहा कि हर तानाशाह यही कहता है कि वह लोगों का प्रतिनिधित्व करता है. अपने बारे में टिप्पणी करते हुये गिलानी ने कहा कि मुझे विश्वास मत की जरूरत नहीं है. मैं संविधान में तब्दीली कर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के कार्यकाल को सीमित करना चाहता हूं. हालांकि असेंबली की अगली बैठक अब सोमवार को होगी.