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मायावती का सूखा सादा जन्मदिन

मायावती का सूखा सादा जन्मदिन

लखनऊ. 15 जनवरी 2012

मायावती


उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती का जन्मदिन इस बार बेहद सूखा-सूखा और सादा-सादा मन रहा है. मायावती के जन्मदिन की कई दिनों पहले से शुरु हुई चर्चा कई दिनों बाद तक बनी रहती थी लेकिन इस साल चुनाव आयोग के निर्देशों के कारण उनका जन्मदिन महोत्सव ठंडा पड़ा हुआ है. रविवार की सुबह कुछ चुनिंदा लोग की मायावती के घर पहुंचे और उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के जन्मदिन को लेकर हर साल भारी-भरकम तैयारी होती थी. बड़े-बड़े नेता और नौकरशाह जन्मदिन का उपहार लेकर लाइन में खड़े रहते थे. लखनऊ शहर सजा होता था और नोटो की माला से लेकर सोने के मुकुट तक मायावती के जन्मदिन को चर्चा में लाते थे. तरह-तरह के केक कटते थे. जन्मदिन के नाम पर करोड़ों की उगाही की चर्चा होती थी. यहां तक कि उनके जन्मदिन का मामला कई दफा अदालतों में जा पहुंचा था. लेकिन उनका 56वां जन्मदिन पहले के मुकाबले इन सब बातों से दूर है. जन्मदिन का खर्च भी चुनाव के खर्च में शामिल होता है, इसलिये मायावती ने इस बार सादगी से जन्मदिन पर जोर दिया है.

वैसे मायावती का जीवन भी किसी चमत्कार से कम नहीं है. 15 जनवरी 1956 को एक दलित परिवार में जन्मी मायावती ने बीए, बीएड, एलएलबी करने के बाद मायावती प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती थीं. उन्होंने कुछ समय तक दिल्ली में अध्यापन का भी काम किया. लेकिन बसपा नेता कांशीराम ने उन्हें बसपा में ला कर राजनीति की एक ऐसी धरातल पर उतार दिया, जहां उनके सामने व्यापक संभावनाएं थीं.

1989 में वे पहली बार लोकसभा के लिये चुनी गईं, फिर 1998, 1999 और 2004 में भी लोकसभा के लिये जनता ने उनका चयन किया. इसके बाद 1994 और 2004 में वे राज्यसभा के लिये भी चुनी गईं. इस दौरान वे विधानसभा की भी सदस्य रहीं और 1995, 1997, 2002 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं. चौंथी बार में 13 मई 2007 में मुख्यमंत्री बनीं और अब तक वे इस पद पर हैं.

अपने 56 साल के जीवन में मायावती का विवादों से गहरा नाता रहा है लेकिन उन्होंने किसी की परवाह नहीं की. कई बार जेल जाते-जाते बचीं मायावती के खिलाफ अभी भी कई मामले अदालत में हैं. लेकिन सियासत की चाल में मायावती ने हमेशा लोगों को पटखनी दी है. इस बार भी उन्होंने अपने समर्थकों से कहा है कि बतौर जन्मदिन का उपहार उन्हें उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक सीटें दें, जिससे वे बहुजन समाज की सेवा कर सकें.


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