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फिर भूख से मरेंगे सोमालिया में लाखों लोग

फिर भूख से मरेंगे सोमालिया में लाखों लोग

मोगादिशू. 16 जनवरी 2012

सोमालिया


भारत समेत दुनिया भर में जब करोड़ों टन गेहूं और चावल सड़ रहे हैं, उसी समय भूख से होने वाली मौत का घर कहे जाने वाले सोमालिया में आने वाले दिनों में अकाल के कारण लाखों लोगों के एक बार फिर भूख से मारे जाने की आशंका जताई गई है. तमाम कोशिशों के बाद भी इस उत्तर पूर्वी देश में कुपोषण कम होने का नाम नहीं ले रही है.

संयुक्त राष्ट्र संघ राहत संस्था के मुखिया मार्क बाउडन ने ब्रिटिश ब्राडकास्टिंग कॉरपोरेशन से बातचीत में कहा है कि दुनिया में आश्चर्यजनक रुप से सर्वाधिक कुपोषण सोमालिया में है. कुपोषण के कारण पिछले कई सालों से लोग वहां काल के गाल में समा रहे हैं. वहां आज की तारीख में भी 250000 लोग अकाल के कारण भूखमरी के कगार पर हैं.

आने वाले दिनों की भयावहता के बारे में मार्क बाउडन का कहना था कि सोमालिया में 50 फीसदी बच्चों की आबादी भयावह रुप से कुपोषण से ग्रसित है. ऐसे में आने वाले दिनों में अकाल से बच्चे सर्वाधिक प्रभावित होंगे.

पिछले 20 सालों से वहां कई हथियारबंद समूह भोजन और अपने अधिकार के लिये संघर्षरत हैं. ब्रिटेन की एक रिस्क कंसल्टेंसी फर्म मैपलक्रोफ्ट के सर्वे के अनुसार कई अफ्रीका के जिन देशों में पानी की सबसे अधिक किल्लत है, उनमें सोमालिया, मोरीतानिया और सुडान पहले नंबर पर हैं. यानी भूख के साथ-साथ पानी भी सोमालिया के लिये बड़ा संकट है. सोमालिया से लगभग 15 लाख लोगों का भोजन की तलाश में पलायन हो गया है. उत्तरपश्चिम में जिबूती, दक्षिण पश्चिम के केन्या और पश्चिम में इथियोपिया जैसे देशों में लाखों की संख्या में सोमालिया के लोगों का आना-जाना लगा हुआ है.

सोमालिया में अल कायदा से जुड़े हुये अल शहाब समूह का कई इलाकों पर कब्जा है और केन्या के साथ इनका टकराव भी होता रहता है. पिछले सप्ताह भी केन्या ने सोमालिया की सीमा में घुस कर बमबारी की थी, जिसमें 50 से अधिक लोग मारे गये थे.

दुनिया के कल्याण के नाम पर इराक, अफगानिस्तान, लिबिया और अब इरान में अपनी ताकत झोंकने वाले दुनिया के सबसे बड़े दरोगा अमरीका के लिये सोमालिया कहीं भी मुद्दा नहीं है. इसके पीछे एक बड़ा कारण ये है कि सोमालिया में तेल नहीं है. अमरीका के इशारे पर चलने वाले संयुक्त राष्ट्र संघ के लिये भी सोमालिया केवल खानापूर्ति की प्रयोगशाला भर है. सोमालिया में पिछले 20 सालों से भूख की शिकार मांएं अपने भूखे और बीमार बच्चों को सड़कों के किनारे तड़पता छोड़ती रही हैं, ताकि अपनी आंखों के सामने उनकी मौत नहीं देखनी पड़े लेकिन मानव की मुक्ति का राग अलापने वाले अमरीका की नज़र अब तक यहां नहीं पड़ी.