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कोर्ट में सरकार से निपटेंगे सेना प्रमुख वीके सिंह

कोर्ट में सरकार से निपटेंगे सेना प्रमुख वीके सिंह

नई दिल्ली. 16 जनवरी 2012

जनरल वीके सिंह


उम्र विवाद से नाराज भारतीय सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है. यह पहला मौका है कि देश के किसी सेनाध्यक्ष ने सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. पाकिस्तान में सरकार और सेना के आमने-सामने होने की खबर के बीच जनरल विजय कुमार सिंह के सरकार को सुप्रीम कोर्ट में घसीटे जाने को गंभीरता से लिया जा रहा है. इधर रक्षा मंत्रालय ने सेना प्रमुख के सुप्रीम कोर्ट जाने पर एक अहम बैठक बुलाई है.

25 अगस्त 2011 को जनरल वीके सिंह ने अपनी उम्र को लेकर रक्षा मंत्रालय से शिकायत की थी. जिसमें उन्होंने उनकी उम्र 10 मई,1951 मानने की बात कही थी. दो बार एटार्नी जनरल स्तर पर बात करने के बाद भी रक्षा मंत्रालय ने उनकी शिकायत खारिज कर दी थी.

गौरतलब है कि सेनाप्रमुख जनरल वीके सिंह की उम्र का मामला पहली बार उस समय सामने आया, जब समाजवादी सांसद मोहन सिंह ने राज्यसभा में सरकार से इस संबंध में जानकारी मांगी. उनके सवाल के जवाब में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जनरल वी के सिंह के चयन के दस्तावेज में उनकी जन्म की तारीख 10 मई 1950 बताई गई है. इसी आधार पर उन्हें पदोन्नति भी मिली है. जाहिर है, इसी आधार पर जनरल सिंह को 10 मई 2012 में सेवानिवृत किया जाना तय है.

रक्षा मंत्रालय के इस जवाब पर मोहन सिंह ने सरकार को घेरते हुये पत्र लिखा कि वीके सिंह के मैट्रिक के सर्टिफिकेट में 10 मई 1951 की तारीख दर्ज है. सेना के दस्तावेज में भी जनरल वीके सिंह की दो जन्म तिथियां दर्ज हैं. एडज्यूटेंट जनरल की सेना मुख्यालय शाखा की सूची में यह 10 मई,1951 है. दूसरी ओर मिलिट्री सचिव की शाखा में सिंह की जन्म की तारीख 10 मई, 1950 लिखी हुई है.

बाद में अगस्त में जनरल वीके सिंह ने रक्षा मंत्रालय को अपनी जन्म की तारीख सुधारने का आवेदन दिया. लेकिन सरकार की ओर से ऐसा करने से इंकार कर दिया गया. इसके बाद कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि जनरल वीके सिंह जरुर एक काबिल अफसर हैं, लेकिन कोई भी कानून के दायरे से बाहर नहीं है. अगर वीके सिंह के रिकार्ड में कोई गड़बड़ी थी तो वे आज तक चुप क्यों थे?

लेकिन अपनी चुप्पी को तोड़ते हुये अब जनरल वीके सिंह ने पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जा कर सरकार को चौंका दिया है. भारतीय इतिहास में यह पहला अवसर है, जब कोई सेना प्रमुख अपनी ही सरकार के खिलाफ अदालत में गया हो.