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लोकायुक्त मामले में मोदी की याचिका खारिज

लोकायुक्त मामले में मोदी की याचिका खारिज

अहमदाबाद. 18 जनवरी 2012

नरेंद्र मोदी


गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. गुजरात में राज्यपाल द्वारा बिना राज्य सरकार की सलाह के लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर उच्च न्यायालय में दायर की गई उनकी याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को सही ठहराया है.

गौरतलब है कि गुजरात में लोकायुक्त का पद सात वर्षों से खाली था और उच्च न्यायालय के कहने के बाद भी राज्य सरकार ने लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की थी. इसके बाद पिछले साल अगस्त में राज्यपाल कमला बेनीवाल ने राज्य सरकार की बिना जानकारी के ही अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरए मेहता को राज्य का लोकायुक्त नियुक्त कर दिया था. इस नियुक्ति को लेकर नरेंद्र मोदी ने आपत्ति दर्ज की थी और कहा था कि यह राजनीति से प्रेरित कदम है.

राज्यपाल कमला बेनीवाल द्वारा लोकायुक्त नियुक्ति को लेकर नरेंद्र मोदी की सरकार ने गुजरात उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी और कहा था कि राज्यपाल ने नियुक्ति के समय राज्य सरकार की सलाह भी नहीं ली. इस मामले में राज्यपाल को ही पार्टी बनाने की बात कही गई थी लेकिन अदालत ने यह कहते हुए इस सलाह को खारिज कर दिया कि राज्यपाल का पद संवैधानिक है, इसलिये उन्हें इस मामले में पार्टी नहीं बनाया जा सकता. इसके बाद मामले में हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच ने अलग-अलग फैसला सुनाया, जिसके कारण इसे तीसरे जज को सौंपा गया था.

बुधवार को इस मामले की सुनावाई करते हुये अदालत ने नरेंद्र मोदी सरकार की याचिका को खारिज कर दिया. अदालत ने राज्यपाल द्वारा लोकायुक्त के निर्णय पर मुहर लगा दी. फैसले पर टिप्पणी करते हुये गुजरात सरकार के प्रवक्ता जय नारायण व्यास ने कहा कि हम कभी भी लोकायुक्त की नियुक्ति के खिलाफ नहीं रहे हैं. लोकायुक्त की जिस तरीके से नियुक्ति हुई, हम उसके खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले को हार या जीत की तरह नहीं देखा जाना चाहिये. उन्होंने यह भी कहा कि फैसले की कॉपी मिलने के बाद ही सरकार तय करेगी कि आगे क्या करना है.

कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुये कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि भी नरेंद्र मोदी को और झटके लगेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार को मान लेना चाहिये कि वो गैर संवैधानिक तरीके से काम करना चाहती है.


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