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माई नेम इज एंथनी गोंजाल्विस

माई नेम इज एंथनी गोंजाल्विस

पणजी. 19 जनवरी 2012

एंथनी गोंजाल्विस


एंथनी गोंजाल्विस नहीं रहे. वही एंथनी गोंजाल्विस, जिन्हें समर्पित करते हुये 1977 में अमर अकबर एंथनी फिल्म के लिये किशोर कुमार ने गाया था- माइ नेम इज़ एंथनी गोज़ाल्विस. इसे गोंजाल्विस के शिष्य संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने अपने गुरु के लिये कंपोज किया था.

भारत के पहले म्यूजिक अरेंजर और सुप्रसिद्ध संगीतकार 84 साल के एंथनी गोंजाल्विस का गोवा में न्यूमोनिया से निधन हो गया. एंथनी गोंजाल्विस के परिवार में उनकी पत्नी मेलिता, पुत्र किरन एवं पुत्री लक्ष्मी हैं. गोंजाल्विस के शिष्यों की एक लंबी फेहरिश्त है. जिनमें लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से लेकर आर डी बर्मन तक शामिल थे.

एंथनी गोंजाल्विस ने 16 साल की उम्र में अपने पिता के साथ बतौर वायलिन वादक करियर की शुरुवात की और इस विदेशी वाद्य यंत्र के साथ उन्होंने पंडित रविशंकर, उस्ताद अल्लाहरख्खा ख़ान, उस्तीद अली अकबर ख़ान जैसे शास्त्रीय लोगों के की संगत की.

1950-60 के दौर की नया दौर, महल और दिल्लगी जैसी फिल्मों में उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता. बतौर म्यूजिक अरेंजर एंथनी गोंजाल्विस की पहचान तो थी ही, एक श्रेष्ठ वायलिनवादक के बतौर भी उन्होंने कई संगीतकारों के साथ काम किया. लक्ष्मीकांत प्यारेलाल को एंथनी गोंजाल्विस ने ही वायलिन बजाना सिखाया था.

श्रीकांत जोशी ने पिछले साल ही बांबे टॉकिज के इस सुपर स्टार एंथनी गोंजाल्विस पर एक फिल्म बनाई थी. श्रीकांत जोशी के अनुसार एंथनी गोंजाल्विस को उनके गोवा में ही लगभग भुला दिया गया था. श्रीकांत ने अपनी फिल्म के लिये अशोक राणे को निर्देशन के लिये चुना और उन्हें गोवा भेजा. लेकिन जिस गोवा में लगभग हरेक आदमी एक दूसरे को जानता है, वहां एंथनी गोंजाल्विस को तलाशने में पसीने आ गये.


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