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हाथ से खाना खिलाया तो सरकार ने छीन लिया बच्चा

हाथ से खाना खिलाया तो सरकार ने छीन लिया बच्चा

ओस्लो. 20 जनवरी 2012

अनुरुप और सागरिका भट्टाचार्य


कोलकाता के अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य के लिये किसी सदमे से कम नहीं है. अपने तीन साल के बेटे अभिज्ञान और एक साल की बेटी ऐश्वर्या को गोद में बिठाकर हाथ से खाना खिलाने और साथ में सुलाने पर नार्वे सरकार ने दोनों बच्चों को सरकारी संरक्षण में ले लिया है. अब अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य अपने बच्चों से 18 साल की उम्र तक हर छह महीने में केवल एक बार वो भी एक घंटे के लिये मिल पाएंगे. अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य का वीज़ा खत्म होने को है और दोनों दूतावास और अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं.

मामले की शुरुवात पिछले साल मई में हुई, जब नार्वे की सरकार ने यह कहते हुये अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य के व्यवहार को लेकर आपत्ति की कि वे अपने बच्चों को जबरजस्ती हाथ से खाना मुंह में डालते हैं. इसके अलावा सरकार को इस बात पर भी आपत्ति थी कि उनका बेटा अपने पिता के साथ सोता है.

भट्टाचार्य दंपत्ति ने नार्वे सरकार को यह समझाने की कोशिश की कि भारतीय परंपरा में बच्चों को हाथ से खिलाना प्यार देने की निशानी है. इसके अलावा छोटे बच्चों को साथ में ही सुलाया जाता है. पश्चिमी देशों की तरह बच्चों को अलग कमरे में अलग-थलग नहीं सुलाया जाता. लेकिन सरकारी अफसरों ने उनकी एक नहीं सुनी और उनके दोनों बच्चों को नॉर्वे चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विस ने उनसे छीन कर अपने संरक्षण में ले लिया.

इस मामले में भारतीय दूतावास ने भी नार्वे की नॉर्वे चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विस से स्थिति स्पष्ट करते हुये बच्चों को उनके अभिभावकों को वापस करने का अनुरोध किया लेकिन नॉर्वे चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विस ने ऐसा करने से इंकार कर दिया. हालत ये है कि अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य का वीज़ा इस साल मार्च में खत्म हो रहा है और उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वे क्या करें. नार्वे सरकार उनके बच्चों को लौटा नहीं रही है और बिना बच्चों के वे वापस भारत नहीं लौटना चाहते.