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वोडाफोन झटके के बाद बदल सकते हैं टैक्स नियम

वोडाफोन झटके के बाद बदल सकते हैं टैक्स नियम

नई दिल्ली. 21 जनवरी 2012

वोडाफोन


वोडाफोन से टैक्स वसूलने के मामले में अपनी फजीहत करवा चुकी सरकार आने वाले दिनों में अपने टैक्स नियमों में बदलाव कर सकती है. माना जा रहा है कि वोडाफोन को लेकर कोर्ट ने जो आदेश दिया है, उसके बाद विदेशी कंपनियां उन देशों में व्यापारिक समझौते करेंगी, जहां उन्हें कम से कम टैक्स चुकाना पड़ता है. इससे भारत में भले निवेश का लाभ हो, लेकिन बतौर टैक्स चवन्नी भी नहीं मिलेगी.

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने आयकर विभाग द्वारा वोडाफोन की अर्जित सम्पत्ति पर बकाया के रूप में मांगे जा रहे 11,217 करोड़ रूपए की उगाही किए जाने को न्यायसंगत नहीं मानते हुये कहा था कि विदेश में पूरा हुए सौदे भारतीय कर विभाग के क्षेत्राधिकार में नहीं आते हैं.

गौरतलब है कि ब्रिटिश संचार कंपनी वोडाफोन पीएलसी ने भारत में एस्सार कंपनी के साथ अपना कारोबार शुरु किया था और हच एस्सार में 55000 करोड़ रुपये में हिस्सेदारी खरीदी थी. इसके लिये जो लेन-देन हुआ, उसमें वोडाफोन ने एस्सार और हांगकांग की कंपनी हचसन को 11 अरब डॉलर का नकद भुगतान किया. लेकिन न तो वोडाफोन और एस्सार ने और ना ही हचसन ने भारतीय आयकर विभाग को टैक्स प्रदान किया.

मामला सामने आने के बाद भारतीय आयकर विभाग ने वोडाफोन-एस्सार को 11.217 करोड़ रुपए का भुगतान करने के लिये नोटिस जारी किया लेकिन वोडाफोन ने इससे इंकार कर दिया. इसके बाद मामला मुंबई हाईकोर्ट में जा पहुंचा. कोर्ट का कहना था कि ये सारा कारोबार भारत से बाहर हुआ है लेकिन वोडाफोन को टैक्स की कुछ रकम देनी चाहिये.

इसके बाद मामला उच्चतम न्यायालय में जा पहुंचा. जिसकी सुनवाई उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने की. वोडाफोन और आयकर विभाग के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आर्थिक गतिविधियों में स्थायित्व के लिए निवेशकों को अपनी स्थिति से वाकिफ रहना चाहिए. हच एस्सार अविश्वसनीय कम्पनी नहीं है. वह 1994 से भारत में मौजूद है और उसने प्रत्यक्ष और परोक्ष कर के रूप में राजस्व में 20,242 करोड़ रूपए जमा किए हैं.

अदालत ने आदेश दिया कि कर विभाग दो महीने के भीतर वोडाफोन को 2,500 करोड़ रूपए की वह राशि लौटा देगा, जो कम्पनी ने जमा किए थे. आदेश में यह भी कहा गया है कि कर अधिकारी इस राशि पर चार फीसदी सालाना की दर से कम्पनी को ब्याज भी अदा करेंगे.


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