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नाइजीरिया ब्लास्ट में अब तक 150 की मौत

नाइजीरिया ब्लास्ट में अब तक 150 की मौत

कानो. 22 जनवरी 2012 बीबीसी

नाइजीरिया ब्लास्ट


नाइजीरिया के दूसरे सबसे बड़े शहर कानो में शुक्रवार को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में लगभग 150 लोग मारे गए हैं. अस्पताल धायलों से और शव गृह मृतकों से भर गए हैं. अस्पताल में घायलों का आना लगातार जारी है.

सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद शहर में 24 घंटे का कर्फ्यू लगा दिया गया है. उत्तरी नाइजीरिया के इस मुस्लिम बहुल इलाक़े में हुई वारदात को इस्लामी चरमपंथी संगठन बोको हराम ने अंजाम दिया है. बोको हराम संगठन ने हमलों की ज़िम्मेदारी लेते हुए कहा है कि वो इस सरकार को उखाड़ कर इस्लामी राष्ट्र की स्थापना करना चाहते हैं.

एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उसने शहर के मुख्य अस्पताल में 150 शवों को देखा है जबकि मृतकों के बारे में सरकारी आंकड़ा 20 है. उनके अनुसार शुक्रवार को हुई घटना के बाद शनिवार को भी गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल ले जाया जा रहा है.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया है कि उसने 30 धमाके सुने और उसके बाद गिनती नहीं कर पाया. एक अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया था कि एक आत्मघाती हमलावर ने पुलिस मुख्यालय में धमाका किया था और कई अन्य पुलिस स्टेशनों और सरकारी दफ़्तरों में भी धमाके किए गए.

कानो में लगभग 1700 भारतीय परिवार रहते है. इनमें से अनेक व्यावसायी है जबकि कई अन्य सूचनातकनीक और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ हैं. कानो में मौजूद एक भारतीय सॉफ़्टवेयर इंज़ीनियर धीरज सिंह ने बीबीसी हिंदी के राजेश जोशी को बताया, "एक धमाका मेरे घर की पीछे वाली गली में हुआ जिसकी आवाज़ इतनी भीषण थी कि मेरे घर के शीशे टूट गए, बिजली की ट्यूबें टूट गई, मेरे दोनों बच्चे सहम गए और चारों ओर अंधेरा छा गया. शहर में कर्फ़्यू लगा दिया गया और जो लोग जहाँ थे, जिसके घर में थे, कल रात से वहीं बैठे हुए हैं."

उन्होंने बताया, "सड़कों पर चारों ओर सन्नाटा छाया हुआ है. कहीं कोई वाहन या फिर पुलिस की गश्त भी नज़र नहीं आ रही है. फ़िलहाल भारतीय दूतावास या किसी अन्य प्रशासनिक अधिकारी की ओर से भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं किया गया है."

इन हमलों की चरमपंथी इस्लामी संगठन बोको हराम ने ज़िम्मेदारी ली है. ग़ौरतलब है कि बोको हराम का अनुवाद है - 'पश्चिमी शिक्षा प्रतिबंधित है.' उत्तरी नाइजीरिया के मुस्लिम बाहुल इलाक़े में इस संगठन ने कई हिंसक वारदातों को अंजाम दिया है.

उधर विवादों में घिरी नागरिक अधिकारों के कार्यकर्ताओं की शनिवार को बुलाई गई एक रैली आयोजित नहीं हो रही है. सरकार के कथित भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ बुलाई गई इस रैली के आयोजकों का कहना है कि उन्हें डर है कि चरमपंथी इसमें घुसपैठ कर जान-माल का नुक़सान कर सकते हैं. उधर पुलिस ने एक बयान में कहा है कि शहर में चार पुलिस स्टेशनों समेत पासपोर्ट और आप्रवासन दफ़्तरों को भी निशाना बनाया गया है.


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