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कलेक्टर के हत्यारे की किताब का विमोचन करेंगे नामवर सिंह

कलेक्टर के हत्यारे की किताब का विमोचन करेंगे नामवर सिंह

रायपुर. 23 जनवरी 2012

नामवर सिंह


बिहार के एक कलेक्टर जी कृष्णैया की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे बाहुबली नेता आनंद मोहन की कविता संग्रह का विमोचन सोमवार को प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह करेंगे. राजकमल प्रकाशन द्वार प्रकाशित इस कविता संग्रह का नामवर जैसे आलोचक के हाथों विमोचन की खबर से साहित्य जगत में हलचल है.

उल्लेखनीय है कि नामवर सिंह भारत के वामपंथी विचारधारा वाले लेखकों के प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष रहे हैं. उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई. एक कुख्यात अपराधी की किताब का विमोचन मंजूर करके नामवर सिंह ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

इस किताब के बारे में राजकमल प्रकाशन के प्रमुख अशोक माहेश्वरी ने इस संवाददाता से चर्चा करते हुए कहा कि किसी कैदी को भी अपनी भावनाएं दुनिया के सामने रखने का हक है, यह सोचकर उन्होंने यह किताब प्रकाशित की है. उनसे पूछा गया कि क्या नामवर सिंह इसका विमोचन कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि उन्होंने इसकी मंजूरी तो दे दी है, लेकिन आज शायद उनकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है, इसलिए कार्यक्रम कुछ बदल भी सकता है.

पूर्व सांसद आनंद मोहन फिलहाल गोपालगंज, बिहार के कलेक्टर जी कृष्णैया की हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं. कृष्णैया हत्याकांड में चार नवंबर, 2007 को स्थानीय अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें इस जेल लाया गया था. फांसी की सजा होने के कारण आनंद मोहन को जेल की विशेष सेल में अकेले रखा गया था. पटना हाईकोर्ट द्वारा फांसी की सजा को उम्र कैद में बदलने के बाद उन्हें सहरसा की जिला जेल में स्थानांतरित कर दिया गया.

गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया हत्याकांड के दोषी पूर्व सांसद आनंद मोहन पर हत्या के 27 मामले थे, जिनमें से 26 में न्यायालय द्वारा साक्ष्य के अभाव में उन्हें बरी किया जा चुका है. इसके अलावा सरकारी कार्य में बाधा डालने व तीन पुलिस अधिकारियों को बंधक बनाने के आरोप में उन्हें सहरसा न्यायालय से तीन माह की सजा हुई है. कविता संग्रह 'कैद में आजाद कलम’ में अधिकांश कविताएं 2007-08 में भागलपुर की सेंट्रल जेल में सजा काटने के दौरान लिखी गई हैं.

इस किताब के बारे में अशोक माहेश्वरी ने कहा कि इसमें आनंद मोहन ने अपने जीवन, अपने परिवार के बारे में लिखा है और कुछ महापुरूषों के बारे में भी लिखा है. उनसे जब पूछा गया कि इसका खर्च आनंद मोहन उठा रहा है या राजकमल? तो उनका कहना था कि किसी भी दूसरी किताब की तरह राजकमल खुद ही इसे प्रकाशित कर रहा है. उनसे पूछा गया कि क्या इसकी साहित्यिक उत्कृष्टता को राजकमल में किसी ने तौला है तो उनका कहना था कि इसे पूरी तरह पढ़कर ही छापने के लिए छांटा गया है.

मिली जानकारी के अनुसार कविता संग्रह के साथ ही आनंद मोहन ने जेल के अनुभवों को भी लिपिबद्ध किया है, जो 'कालकोठरी से’ शीर्षक के तहत दो भागों में छपेगा. इस जेल डायरी को भी राजकमल प्रकाशन ही प्रकाशित करेगा.


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