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मां-बाप से अलग बच्चों पर नार्वे से बात करेंगे कृष्णा

मां-बाप से अलग बच्चों पर नार्वे से बात करेंगे कृष्णा

नई दिल्ली. 23 जनवरी 2012

एस एम कृष्णा


नार्वे में मां-बाप से अलग किये गये अभिज्ञान और ऐश्वर्या को उनका मां-बाप को सौंपने के मुद्दे पर सोमवार को भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा नार्वे के विदेश मंत्री से बातचीत करेंगे. उन्होंने उम्मीद जताई है कि बच्चों को उनके माता-पिता को सौंप दिया जाएगा. अगर ऐसा संभव नहीं हो सका तो नार्वे सरकार से अनुरोध किया जाएगा कि वे बच्चों को भारत में रहने वाले उनके दादा-दादी को सौंप दें. इस मुद्दे पर रविवार को नार्वे में भारत के राजदूत आर के त्यागी ने भी नार्वे के विदेश मंत्री से बातचीत की थी.

गौरतलब है कि कोलकाता के अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य द्वारा अपने तीन साल के बेटे अभिज्ञान और एक साल की बेटी ऐश्वर्या को गोद में बिठाकर हाथ से खाना खिलाने और साथ में सुलाने पर नार्वे सरकार ने दोनों बच्चों को सरकारी संरक्षण में ले लिया है. नार्वे सरकार का कहना है कि अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य अपने बच्चों से 18 साल की उम्र तक हर छह महीने में केवल एक बार वो भी एक घंटे के लिये मिल पाएंगे.

मामले की शुरुवात पिछले साल मई में हुई, जब नार्वे की सरकार ने यह कहते हुये अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य के व्यवहार को लेकर आपत्ति की कि वे अपने बच्चों को जबरजस्ती हाथ से खाना मुंह में डालते हैं. इसके अलावा सरकार को इस बात पर भी आपत्ति थी कि उनका बेटा अपने पिता के साथ सोता है.

भट्टाचार्य दंपत्ति ने नार्वे सरकार को यह समझाने की कोशिश की कि भारतीय परंपरा में बच्चों को हाथ से खिलाना प्यार देने की निशानी है. इसके अलावा छोटे बच्चों को साथ में ही सुलाया जाता है. पश्चिमी देशों की तरह बच्चों को अलग कमरे में अलग-थलग नहीं सुलाया जाता. लेकिन सरकारी अफसरों ने उनकी एक नहीं सुनी और उनके दोनों बच्चों को नॉर्वे चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विस ने उनसे छीन कर अपने संरक्षण में ले लिया.

इस मामले में भारतीय दूतावास ने भी नार्वे की नॉर्वे चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विस से स्थिति स्पष्ट करते हुये बच्चों को उनके अभिभावकों को वापस करने का अनुरोध किया लेकिन नॉर्वे चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विस ने ऐसा करने से इंकार कर दिया. हालत ये है कि अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य का वीज़ा इस साल मार्च में खत्म हो रहा है. नार्वे सरकार उनके बच्चों को लौटा नहीं रही है और बिना बच्चों के वे वापस भारत नहीं लौटना चाहते.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

sunita [] punjab - 2012-01-24 03:43:26

 
  भारत सरकार को इस परिवार की मदद करनी चाहिए. माता-पिता अपने बच्चों का कभी बुरा नहीं सोचते. 
   
 

Narayan [nc619660@gmail.com] Bangalore - 2012-01-23 08:24:46

 
  अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य को नार्वे की सरकार का कानून (बच्चों की परवरिश करने का) मालूम नहीं था और नार्वे की सरकीर भी एक बार उनके कानून के बारे में बता देना चाहिए था और उसके बाद एक चेतावनी देनी चाहिए थी. बच्चों को लेकर इस तरह की घटिया या भारत देश की संस्कृति से उल्टे uncultured) कानून के बारे में अगर भट्टाचार्य दंपत्ति जान जाते तो हरगिज़ उस नॉर्वे की धरती पर एक दिन के लिए भी नहीं ठहरते. 
   
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