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सद्दाम हुसैन की कब्र प्रतिबंधित

सद्दाम हुसैन की कब्र प्रतिबंधित

बगदाद. 24 जनवरी 2012

सद्दाम हुसैन


इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की फांसी को छह साल होने को आ गये लेकिन सद्दाम हुसैन का भूत पीछा ही नहीं छोड़ता. अमरीका की शह पर बनाई गई इराक की सरकार ने निर्णय लिया है कि सद्दाम हुसैन के कब्र पर अब किसी को भी जाने की इजाजत न दी जाये. सरकार के निर्णय का तुरंत पालन हुआ और लगभग एक पखवाड़े से सद्दाम हुसैन की कब्र दुनिया के तमाम लोगों के लिये प्रतिबंधित कर दी गई है.

गौरतलब है कि कई सालों तक ब्रिटेन के गुलाम रहे इराक में 60 के दशक तक पश्चिमी देशों का ही लगभग कब्जा था, जिसके खिलाफ 1962 में विद्रोह हुआ और सेना के लोगों ने सत्ता अपने हाथ में ले ली. बाद में वर्ष 1968 में बाथ पार्टी के नेता सद्दाम हुसैन ने इराक की सत्ता संभाली व शीतयुद्ध के जमाने में सोवियत संघ के साथ 15 साल का समझौता किया और तेल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण करके इराक की आर्थिक स्थिति सुधारी. लेकिन अमरीका की शह पर सद्दाम हुसैन ने इरान जैसे देशों पर हमले किये, विरोधियों को मरवाया और तानाशाह बन बैठे. लेकिन 90 की दशक में अमरीका की नाक के बाल रहे सद्दाम हुसैन उसकी आंखों की किरकिरी बन गये. इराक की मुक्ति के नाम पर अमरीका ने इराक पर एक के बाद एक हमला किया. 9 अप्रैल 2003 को सद्दाम हुसैन की सरकार गिराई गई और 13 दिसंबर, 2003 को सद्दाम हुसैन को पकड़ लिया गया और अमरीका की देखरेख में 30 दिसंबर 2006 में उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया.

सद्दाम हुसैन के गृहनगर तिकरित से पांच किलोमीटर दूर अल-औजा की एक कब्रिस्तान में सद्दाम हुसैन, उनके दो बेटे और कई परिजनों समेत बॉथ पार्टी के नेताओं की कब्रें हैं. सलाहुद्दीन इलाके में स्थित इन कब्रों पर 2008 तक जाना प्रतिबंधित था. लेकिन जब प्रतिबंध हटा तो लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी.

अब एक बार फिर जब सद्दाम हुसैन की बेटी रगद ने अपने पिता की कब्र पर जाने की घोषणा की तो किसी अनहोनी की आशंका के मद्देनजर इराक सरकार ने कब्र पर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया. माना जा रहा है कि अगर लोगों का सद्दाम की कब्र पर जाने का सिलसिला रोका नहीं गया तो इराक में प्रतिबंधित बाथ पार्टी के समर्थकों को इससे बल मिलेगा और वे सरकार के खिलाफ वातावरण बना सकते हैं.


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