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सीरियल किलर ने खोले कुछ और हत्याओं के राज

सीरियल किलर ने खोले कुछ और हत्याओं के राज

रायपुर. 24 जनवरी 2012


छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कुकुरबेड़ा इलाके में निठारी की तरह एक के बाद एक मानवकंकालों के मिलने से राजधानी में सनसनी फैली हुई है. पुलिस का मानना है कि इस मामले के आरोपी अरुण चंद्राकर से कुछ और हत्याओं के राज खुल सकते हैं. आरोपी ने अब तक सात लोगों को मारने की बात स्वीकार की है लेकिन पुलिस के अनुसार अभी कुछ और मामले सामने आ सकते हैं. इस घटना के साथ ही राजधानी रायपुर समेत राज्य के दूसरे हिस्सों से लापता लगभग 20 हजार लोगों के बारे में भी सवाल उठने लगे हैं.

गौरतलब है कि राजधानी रायपुर के कुकुरबेड़ा के देवार बस्ती में रहने वाले अरूण चंद्राकर की पुलिस काफी समय से तलाश कर रही थी. अरुण शातिर बदमाश है. उसके खिलाफ हत्या, चोरी, उठाईगिरी के दर्जनभर से अधिक मामले अलग-अलग थाने में दर्ज हैं. एक पुराने प्रकरण में सरस्वती नगर पुलिस ने उसे पकड़ा और पूछताछ में एक के बाद एक जघन्य हत्याओं का राज फाश होता चला गया.

गुंडरदेही क्षेत्र निवासी अरुण चंद्राकर ने पत्नी, साली-साला और मकान मालिक की हत्या कर लाश घर में ही दफना दी थी. रविवार को इसका राज सामने आया. इसके बाद पुलिस ने चारों लाशों के कंकाल बरामद कर लिए. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपांशु काबरा के अनुसार अरुण ने अभी तक सात लोगों की हत्या करना स्वीकार किया है. उसकी निशानदेही पर कल उसकी पत्नी लीला, साले अखिल, साली पुष्पा और मकान मालिक बहादुर सिंह की लाश के कंकाल बरामद किए गए. चारों को उसने मारकर लाशें घर में ही दफना दी थीं. उन्होंने बताया कि देर रात तक उससे पूछताछ की गई है.

पूछताछ में अरुण ने पिता शत्रुघन चंद्राकर, मामा ससुर संजय देवार और नंदनी अहिवारा निवासी फूलोबाई कलार नाम की एक महिला की भी हत्या करना कबूल किया है. पिता शत्रुघन चंद्राकर अरुण से इसलिए दुखी था कि उसने एक देवार लडक़ी से शादी की थी. वह अपनी जमीन-जायदाद में अरुण को हिस्सा नहीं देना चाहता था. इसलिए अरुण ने पिता को भी ठिकाने लगाने की साजिश रची. पिता को उसने रायपुर स्टेशन बुलवाया और गुढिय़ारी के समीप चलती ट्रेन के सामने उसे धक्का दे दिया था. ट्रेन से कटकर पिता की मौत हो गई थी.

मामा ससुर संजय देवार की हत्या कर उसने आमानाका रेलवे फाटक के सामने गाडऩे की बात कही, जहां खुदाई करके मामा ससुर का कंकाल पुलिस ने बरामद कर लिया है. अरुण ने नंदनी अहिवारा निवासी फूलोबाई कलार नामक एक महिला की भी हत्या की है. उसकी लाश कहां छिपाई गई है, इस बारे में उससे पूछताछ की जा रही है.

इधर कुकुरबेड़ा कांड के सामने आने के साथ ही एक बार फिर राज्य की पुलिस पिछले कुछ सालों में राज्य से लापता लगभग 20 हजार लोगों की फाइलें भी खुलवा रही है. लापता लोगों के मामले में घोर लापरवाही बरतने वाली पुलिस के लिये यह मामला बेहद शर्मिंदगी का साबित हुआ है. पुलिस की नाक के नीचे हत्यारा अरुण चंद्राकर एक के बाद एक लोगों को मारता चला गया और पुलिस सारे मामलों में गुमशुदगी का केस दर्ज कर उसे फाइलों में बंद करती चली गई. लोगों का मानना है कि अगर पुलिस ने शुरुआती मामलों में भी तरीके से छानबीन की होती तो यह नौबत नहीं आती.


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