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पुलिस के मुखबिर को एटीएस ने बताया आतंकवादी

पुलिस के मुखबिर को एटीएस ने बताया आतंकवादी

नई दिल्ली. 24 जनवरी 2012

राकेश मारिया


महाराष्ट्र एटीएस ने 13 जुलाई को मुंबई में हुये सीरियल ब्लास्ट के मामले में जिस नकी अहमद को आतंकवादी बता कर सोमवार को मीडिया के सामने पेश किया, असल में वह दिल्ली पुलिस के मुखबिर के तौर पर काम करता रहा है. यहां तक कि पिछले कुछ सालों में दिल्ली पुलिस ने उसकी मदद से ही कई आतंकवादियों को पकड़ा और कई महत्वपूर्ण ऑपरेशन को अंजाम दिया. दिल्ली पुलिस का आरोप है कि मुंबई एटीएस ने वाहवाही लूटने के लिये इस तरह की हरकत की है.

मुंबई एटीएस की इस किरकिरी के बाद नकी अहमद के परिजनों ने भी आरोप लगाया है कि पुलिस की मदद करने वाले नकी को महाराष्ट्र एटीएस ने लगातार प्रताड़ना दी है और उसे झूठे मामले में फंसाया है.

गौरतलब है कि सोमवार को महाराष्ट्र एटीएस ने पिछले साल 13 जुलाई को मुंबई में हुये सीरियल ब्लास्ट मामले को सुलझाने का दावा करते हुये इस मामले के दो आरोपियों को पेश किया. मुंबई एटीएस प्रमुख राकेश मारिया ने दावा किया था कि नकी अहमद अपने दोस्त के साथ दरभंगा जिले से सितंबर 2010 में मुंबई आया और एंटाप हिल में रहने लगा. मारिया के अनुसार नकी 2008 से अहमद जरार सिद्दिबप्पा उर्फ यासीन भटकल के संपर्क में था औऱ उसके लिये उसने विस्फोटकों को लाने-ले जाने में मदद की.

एटीएस चीफ मारिया की इस कहानी से उलट दिल्ली पुलिस का कहना है कि नकी अहमद कभी भी भटकल की सच्चाई नहीं जानता था. इसके अलावा वह पिछले कुछ सालों से दिल्ली पुलिस के लिये काम करता रहा है. बिहार के दरभंगा के मूल निवासी नकी अहमद ने दिल्ली पुलिस को कई आतंकवादी वारदातों के राज फाश करने में मदद की. इतना ही नहीं, वह दिल्ली पुलिस के लिये देश के अलग-अलग हिस्सों में रेड करने की वारदात में भी शामिल हुआ.

नकी के वकील का कहना है कि महाराष्ट्र एटीएस ने उनके मुवक्किल को जबरजस्ती कैद कर रखा है और उसे वकील से भी मिलने नहीं दिया जा रहा है.


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