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गुजरात पुलिस की मुठभेड़ की जांच के आदेश

गुजरात पुलिस की मुठभेड़ की जांच के आदेश

नई दिल्ली. 25 जनवरी 2012

नरेंद्र मोदी


गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सितारे गड़बड़ा गये हैं. पार्टी के मोर्चे पर तो वो दो चार हो ही रहे हैं, अदालतों में एक के बाद एक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिससे नरेंद्र मोदी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं.

अब पत्रकार वीजी वर्गीज और गीतकार जावेद अख्तर द्वारा दायर दो याचिका पर सुनवाई करते हुये उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि गुजरात में 2003 से 2006 के बीच हुये सभी मामलों की जांच कराई जाये. यह जांच पूर्व न्यायाधीश एम बी शाह की अध्यक्षता वाली समिति करेगी. जांच की रिपोर्ट तीन महीने में सौंपी जाएगी.

गुजरात में ऐसे कम से कम 21 से अधिक मामले हैं, जहां पुलिस की मुठभेड़ पर सवाल खड़े हुये हैं. पत्रकार वीजी वर्गीज और जावेद अख्तर ने अलग-अलग याचिकाएं दायर करके कहा था कि राज्य में खास तौर पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया है. सोहराबुद्दीन हत्याकांड के बाद गुजरात में असली और नकली मुठभेड़ का मामला बहुत साफ हो गया था और आरोप लगा था कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर राज्य में फर्जी मुठभेड़ किये गये.

इसी तरह इशरत जहां को नरेंद्र मोदी की सरकार ने पहले फर्जी मुठभेड़ में मार डाला और बाद में कहा गया कि वह खूंखार आतंकवादी थी. 15 जून 2004 को कॉलेज स्टूडेंट इशरत को उसके तीन दोस्तों के साथ पुलिस ने मार डाला था. इन छात्रों की हत्या उप महानिरीक्षक डी.जी. वंजारा के नेतृत्व मं की गई थी, जिसे बाद में सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ कांड में जेल भेज दिया गया था. इस मुठभेड़ को लेकर इशरत के परिजनों ने उच्चतम न्यायालय में सीबीआई से जांच की मांग की थी लेकिन इसकी एसआईटी से जांच को स्थानीय अदालत ने पर्याप्त माना था. इस जांच दल में तीन आईपीएस शामिल थे.

इस मामले की एसआईटी ने जांच की और पाया कि पुलिस ने मुठभेड़ का जो समय बताया था और जिस समय इशरत और उनके दोस्तों की मौत हुई थी, वह समय बिल्कुल अलग-अलग है. इस मामले में एसआईटी द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के आधार पर गुजरात हाईकोर्ट ने इस फर्जी मुठभेड़ में शामिल 6 पुलिसवालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिये.