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नार्वे सरकार चाचा को सौंपेगी बच्चों को

नार्वे सरकार चाचा को सौंपेगी बच्चों को

ओस्लो. 26 जनवरी 2012

नार्वे में अनुरुप सागरिका


नार्वे सरकार इस बात के लिये तैयार हो गई है कि भारतीय मूल के अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य के बच्चों को उनके चाचा को सौंपा जाएगा. नार्वे सरकार ने बच्चों को उनके माता-पिता को सौंपने से इंकार कर दिया है. चाचा अरणाभाष जल्दी ही ओस्लो जा कर बच्चों को लाएंगे.

गौरतलब है कि कोलकाता के अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य द्वारा अपने तीन साल के बेटे अभिज्ञान और एक साल की बेटी ऐश्वर्या को गोद में बिठाकर हाथ से खाना खिलाने और साथ में सुलाने पर नार्वे सरकार ने दोनों बच्चों को सरकारी संरक्षण में ले लिया है. नार्वे सरकार का कहना है कि अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य अपने बच्चों से 18 साल की उम्र तक हर छह महीने में केवल एक बार वो भी एक घंटे के लिये मिल पाएंगे.

मामले की शुरुवात पिछले साल मई में हुई, जब नार्वे की सरकार ने यह कहते हुये अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य के व्यवहार को लेकर आपत्ति की कि वे अपने बच्चों को जबरजस्ती हाथ से खाना मुंह में डालते हैं. इसके अलावा सरकार को इस बात पर भी आपत्ति थी कि उनका बेटा अपने पिता के साथ सोता है.

भट्टाचार्य दंपत्ति ने नार्वे सरकार को यह समझाने की कोशिश की कि भारतीय परंपरा में बच्चों को हाथ से खिलाना प्यार देने की निशानी है. इसके अलावा छोटे बच्चों को साथ में ही सुलाया जाता है. पश्चिमी देशों की तरह बच्चों को अलग कमरे में अलग-थलग नहीं सुलाया जाता. लेकिन सरकारी अफसरों ने उनकी एक नहीं सुनी और उनके दोनों बच्चों को नॉर्वे चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विस ने उनसे छीन कर अपने संरक्षण में ले लिया.

इस मामले में भारतीय दूतावास ने भी नार्वे की नॉर्वे चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विस से स्थिति स्पष्ट करते हुये बच्चों को उनके अभिभावकों को वापस करने का अनुरोध किया लेकिन नॉर्वे चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विस ने ऐसा करने से इंकार कर दिया. बाद में भारत के विदेश मंत्री ने नार्वे सरकार से बातचीत की. अब कहीं जा कर नार्वे की सरकार उन बच्चों को उनके चाचा को सौंपने के लिये तैयार हो गयी है.


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