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अब ओडिशा के बोंडा आदिवासियों पर बवाल

अब ओडिशा के बोंडा आदिवासियों पर बवाल

भुवनेश्वर. 26 जनवरी 2012

बोंडा


अंडमान-निकोबार की जारवा जनजाति के आदिवासी लड़कियों को अधनंगा करके नचाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि ओडिशा की बोंडा जनजाति के भी प्राकृतिक रुप से रहने को टूर ऑपरेटरों द्वारा प्रचारित करने पर राज्य सरकार के कान खड़े हो गए हैं.

ओडिशा के मलकानगिरी इलाके में बसने वाली इस जनजाति की कुल आबादी 5665 है. आरोप है कि टूर ऑपरेटर इन आदिवासियों के कम कपड़ों में रहने को प्रचारित-प्रसारित करके अपने लिये पर्यटक जुगाड़ते हैं और उसके बाद इन आदिवासियों का शोषण करते हैं. एक अंग्रेजी अखबार में खबर आने के बाद राज्य सरकार ने इस बारे में संबंधित अधिकारियों को पत्र लिख कर पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है.

इधर पर्यटन विभाग ने टूर ऑपरेटरों को पत्र लिख कर उन्हें निर्देश दिया है कि अगर उनकी वेबसाइट या ब्रोशरों में बोंडा जनजाति को लेकर कोई आपत्तिजनक टिका-टिप्पणी या तस्वीर है तो उसे तत्काल प्रभाव से हटा दें.

ओडिशा के मुख्य सचिव विजय कुमार पटनायक कहना है कि इस बारे में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गहरी चिंता दर्शाई है और पूरे मामले की जांच के लिये वरिष्ठ अधिकारियों का एक दल इलाके के दौरे पर जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि अगर मामले में कोई भी दोषी पाया गया तो ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा.

मलकानगिरी जिले की बोंडा पहाड़ी की इस जनजाति की संख्या पिछले कई सालों में एकदम कम बढ़ी है. इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि 1971 में इस जनजाति की जनसंख्या थी 5245 थी और 2008 में यह जनसंख्या 5665 तक ही पहुंच पाई. 1977 से इलाके में बोंडा आदिवासियों के लिये विशेष योजना चल रही है लेकिन सरकारी भ्रष्टाचार के कारण ऐसी योजनाओं का लाभ बोंडा आदिवासियों को नहीं मिल पा रहा है.


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