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माई सैंडल नाटक पर चुनाव तक प्रतिबंध

माई सैंडल नाटक पर चुनाव तक प्रतिबंध

लखनऊ. 27 जनवरी 2012

माई सैंडल


लखनऊ में चुनाव तक माई सैंडल नामक नाटक का मंचन नहीं किया जा सकता. सत्यपथ रंगमंडल के इस नाटक के मंचन पर जिला प्रशासन ने रोक लगा दी है. माना जा रहा है कि नाटककार मुकेश वर्मा का यह नाटक राज्य की मुख्यमंत्री मायावती को लक्ष्य कर लिखा गया है. हालांकि मुकेश वर्मा का कहना है कि यह नाटक 500 साल पुरानी एक कहानी को लेकर रचा गया है और यह महज इत्तफाक है कि इस नाटक की मुख्यपात्र का नाम माया है और वह मायागढ़ में रहती है.

माई सैंडल का मंचन 28 जनवरी को राय उमा नाथ बाली प्रेक्षागृह में होना था. इसके लिये नाटककार मुकेश वर्मा ने जिला प्रशासन से अनुमति मांगी थी लेकिन जिलाधिकारी अनिल सागर ने यह कहते हुये नाटक की अनुमति नहीं दी कि यह नाटक चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है. हालांकि मुकेश वर्मा का कहना है कि जिला प्रशासन अगर नाटक को अनुमति नहीं दे रही है तो वह यह बात लिखित में दे.

इस नाटक माई सैंडल का किस्सा कुछ यूं है कि मायागढ़ में रहने वाली माया का हाथी सोना-चांदी खाता था और माया खूब धुमधाम से अपना जन्मदिन मनाती थी. माया के चापलूस मंत्रियों ने राजकुमारी माया को जन्मदिन में उपहार स्वरुप देने के लिये सोने की सैंडल रखी थी लेकिन सरकारी खजाने में रखी गई यह सैंडल माया का हाथी खा जाता है.

फिर दरबारी वैद्य को बुलाते हैं, ताकि वह हाथी के पेट से सोने की सैंडल निकाल सके. लेकिन इस बात का भय भी दरबारियों को था कि अगर हाथी के पेट से जो कुछ भी निकला और उसकी गंध राज्य में फैली तो राज्य में विद्रोह हो सकता है. ऐसे में वैद्य की दवाई खिला कर सोने की सैंडल निकाल ली गई और हाथी की लीद को राज्य की सीमा में फेंक दिया गया.

लोगों को जब इसका पता चलता है तो जनता विद्रोह करके राजमहल पर हमला बोल देती है और तब कहीं जा कर राजकुमारी की नींद टूटती है और भ्रष्ट मंत्रियों को मारती है.


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