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ब्राह्मणों के जूठन पर लोटना परंपरा है

ब्राह्मणों के जूठन पर लोटना परंपरा है

बेंगलुरु. 3 फरवरी 2012

ब्राह्मण


ब्राह्मणों द्वारा छोड़े गये जूठे पत्तलों पर छोटी जातियों द्वारा लोटते हुये जाने की धार्मिक परंपरा को लेकर कर्नाटक सरकार ने कहा है कि वह इस पर प्रतिबंध नहीं लगा सकती. सरकार का कहना है कि यह मामला धार्मिक आस्था से जुड़ा है और लोगों की आस्था को ठेस नहीं पहुंचाई जा सकती.

गौरतलब है कि कर्नाटक में पिछले कई सालों से मादे स्नाना नामक यह परंपरा चलती आई है, जिसमें ब्राह्मण अपने खाने की जूठा पत्तल फेंक देते हैं और गरीब व छोटी जाति के लोग इन पत्तलों पर लोट कर कथित रुप से पुण्य कमाते हैं. इस पंरपरा को बंद करने को लेकर पिछले कई सालों से विवाद चला आ रहा है. लेकिन सरकार इसके खिलाफ कोई कार्रवाई के पक्ष में नहीं है.

कर्नाटक सरकार का कहना है कि वह मादे स्नाना की परंपरा पर रोक लगाने की कोशिश में जुटी हुई है लेकिन वह लोगों की आस्था से छेड़छाड़ नहीं कर सकती. हालांकि सरकारी सूत्रों ने यह बताने से इंकार कर दिया कि आखिर इस परंपरा को रोकने के लिये कौन से कोशिश की जा रही है.

कर्नाटक विधानसभा में जब कांग्रेस ने यह मामला उठाया तो पहले तो सरकार की ओर से इस पर गोलमोल जवाब ही आया. बाद में धार्मिक मामलों के मंत्री वी एस आचार्य ने कहा कि पांच सालों से यह परंपरा चली आ रही है और इस पर एकाएक रोक नहीं लगाया जा सकता.

उन्होंने कहा कि दक्षिण कन्नड़ के कुक्के सुब्रमण्यम मंदिर में इस परंपरा को रोकने की कोशिश सरकार ने की थी लेकिन आम जनता का प्रतिरोध झेलने के बाद सरकार को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा. उन्होंने कहा कि 64 साल तक कांग्रेस की सत्ता रही, उसने इसे नहीं रोका. बेहतर हो कि हम सब इस मामले में एकजुट हो कर लोगों को शिक्षित करें.


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