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चिदंबरम पर सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका खारिज

चिदंबरम पर सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका खारिज

नई दिल्ली. 4 फरवरी 2012

पी चिदंबरम


पी चिदंबरम को टेलीकॉम घोटाले में सहआरोपी बनाने की सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका अदालत ने खारिज कर दी है. पटियाला हाउस कोर्ट में सीबीआई के स्पेशल जज ओ पी सैनी ने याचिकाकर्ता सुब्रह्मण्यम स्वामी से बंद कमरे में लगभग एक घंटे तक बातचीत के बाद सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका अदालत ने खारिज कर दी. जाहिर है, पी चिदंबरम के लिये यह फैसला बहुत राहत देने वाला है.

सीबीआई के स्पेशल जज ओ पी सैनी ने 21 जनवरी को इस मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. शनिवार को फैसले से पहले अदालत ने सुब्रह्मण्यम स्वामी को अकेले अपने कमरे में बुलाया. इस दौरान अदालत से वकीलों और पत्रकारों को बाहर जाने के निर्देश दिये गये. इससे पहले पत्रकारों से बातचीत करते हुये सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि उन्होंने जितने सबूत पेश किये हैं, उससे उन्हें उम्मीद है कि पी चिदंबरम को जेल जाना ही होगा. स्वामी का कहना था कि पी चिदंबरम भी उतने ही दोषी हैं, जितना इसके लिये ए राजा को बताया जा रहा है.

ज्ञात रहे कि सुब्रह्मण्यम स्वामी ने तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम को भी 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सह आरोपी बनाने के लिये अदालत में अर्जी लगाई थी. स्वामी का कहना था कि राजा ने जो कुछ किया, उसमें पी चिदंबरम की पूरी सहमति थी. टेलीकॉम घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत के जज ओ.पी. सैनी ने पी चिदंबरम को सह आरोपी बनाये जाने की याचिका को स्वीकार कर लिया था और अदालत ने सबसे पहले उनकी ही गवाही करवाई थी.

जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि टेलीकॉम घोटाले में पी चिदंबरम के खिलाफ सारे सबूत हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में भी सहमति जताई थी. जाहिर है, पी चिदंबरम पर आरोप का अर्थ ये भी था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जानकारी में भी सारा घोटाला था. ऐसे में सुब्रह्मण्यम स्वामी के आरोप पूरी यूपीए सरकार को भी घेरे में खड़ी करने वाली थी.

2जी स्पेक्ट्रम मामले में जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी ने हलफनामा दिया था कि 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में ए राजा ने तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम की सहमति से ही सभी घोटालों को अंजाम दिया. स्वामी के अनुसार इसके लिये ए राजा और पी चिदंबरम के बीच कई दौर की बैठकें भी हुईं और इन्हीं बैठकों में स्पेक्ट्रम की कीमतें भी तय की गईं.

सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इस पूरे मामले में राजा और चिदंबरम के बीच की बातचीत का ब्यौरा सौंपते हुये आरोप लगाया था कि पी चिदंबरम ने ही बतौर वित्तमंत्री 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिये पहले आओ, पहले पाओ की नीति को मंजूरी दी थी. यहां तक कि ए राजा ने जब 2001 की निर्धारित दर पर 2जी स्पेक्ट्रम को मंजूरी देने की बात की तो वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने विरोध किया और फिर जब राजा ने 2007 की दर पेश की तो उसे चिदंबरम ने तत्काल अपनी सहमति दे दी.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Pravin Patel [pravin patel@gmail.com] Bilaspur - 2012-02-04 10:47:47

 
  The decision of the Patiala house court is surprising and strange. There were lots of expectation from the court to punish the guilty but any way, Dr. Swamy has to do more homework and approach the higher court to seek justice and send the guilty behind bars to give company to the Raja who was also repeatedly saved by the congress party as being innocent.
 
   
 

naina [] kolkata - 2012-02-04 08:12:47

 
  black saturday for judiciary 
   
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