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महाराष्ट सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
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महाराष्ट्र सरकार को सर्वोच्च न्यायालय का नोटिस

 

नई दिल्ली. 10 नवंबर 2008

 

उत्तर भारतियों पर हो रहे हमलों के मद्देनज़र सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है. यह नोटिस प्रदेश में राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) द्वारा गैर मराठियों और उत्तर भारतियों के खिलाफ चलाए जा रही मुहिम पर रोक लगाने में सरकार की कथित नाकामी के चलते दिया गया.

यह नोटिस मुख्य न्यायाधीश के.जी.बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली न्यायपीठ के द्वारा जारी किया गया है जो इस मुद्दे पर दायर दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी.

इनमें से एक के याचिकाकर्ता श्री सलेक चंद जैन के वकील सुग्रीव दुबे के अनुसार मनसे नेता राज ठाकरे के बयानों से भड़की भीड़ ने जब दो उत्तर भारतीय डॉक्टरों अजय और विजय दुबे की हत्या कर दी तब भी राज्य सरकार ने जरूरी कदम नहीं उठाए. उन्होंने यह भी कहा कि मनसे द्वारा किये गए हमलों पर देशभर में तीव्र प्रतिक्रियाएं हुईं जिससे देश की अखंडता और एकता पर खतरा पैदा हो गया है.

याचिका में उन्होंने केंद्र सरकार पर भी आरोप लगाया कि वो भी इन घटनाओं की मूक दर्शक बनी रही और संविधान की धारा 355 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग कर राज्य सरकार को इंस संवैधानिक संकट से निपटने के लिए जरूरी दिशा निर्देश नहीं दिये.

सोमवार को इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री श्री आर.आर.पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी नोटिस का जवाब देकर स्थिति का खुलासा करेगी.


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