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अनैतिक ड्रग ट्रायल मामले में केंद्र को नोटिस

अनैतिक ड्रग ट्रायल मामले में केंद्र को नोटिस

नई दिल्ली. 7 फरवरी 2012

ड्रग ट्रायल


सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुये ड्रग ट्रायल के मामले में एक महीने के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है. इंदौर के स्वास्थ्य अधिकार मंच की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुये आरएस लोढ़ा एवं एच. एल गोखले की खंडपीठ ने मध्यप्रदेश सरकार को भी इस मामले में नोटिस थमाया है.

स्वास्थ्य अधिकार मंच की ओर से अमूल्य निधि, चिन्मय मिश्र, विजय चौधरी, राजेन्द्र बाजोड़े एवं बेलु जॉर्ज ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. याचिका में मांग की गई थी कि तथाकथित ठेके पर ड्रग ट्रायल करवाने वाली सीआरओ कंपनिया बेलगाम हैं एवं उन पर कोई नियंत्रण नहीं है. ऐसे में इन पर लगाम लगाना एवं नियमन जरुरी है. याचिका में इन सीआरओ कंपनियों के रजिस्ट्रेशन तक नहीं होने पर भी चिंता जताई गई थी.

गौरतलब है कि अनैतिक एवं अनियमितता से भरे हुये ड्रग ट्रायल को लेकर स्वास्थ्य अधिकार मंच लंबे समय से आवाज उठाता रहा है. याचिका में मध्यप्रदेश में हुए अनैतिक ड्रग ट्रायल के अलावा आंध्रप्रदेश आदि स्थानों में हजारों नागरिकों पर हो रहे ड्रग ट्रायलों का हवाला भी दिया गया था.

मंच का दावा है कि अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बहुराष्ट्रीय दवा कंपनिया बहुत ही ताकतवर और मुनाफाखोर हैं. पेटेन्ट अमेन्डमेन्ट के बाद ड्रग एण्ड कोस्मेटीक अधिनियम 1995 में भी बदलाव किये गये, जिस वजह से बहुउद्देशिय ट्रायल भारत में करना संभव हो गया.

स्वास्थ्य अधिकार मंच का दावा है कि ट्रायल करने के लिए ये कंपनिया कॉन्ट्रेक्ट रिर्सच आर्गेनाइजेशन का इस्तमाल करती हैं, जो कम खर्चे में गरीब अनपढ़ लोगों पर ट्रायल करने का आश्वासन इन कंपनियों को देती है.

आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि 2006 से 2009 तक 3138, जनवरी 2010 से दिसंबर 2010 तक 806 एवं इसके बाद फरवरी 2011 तक 928 दवाईयों यानी कुल 4066 ड्रग ट्रायल देश भर में हुए हैं. स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने भी संसद में स्वीकार किया था कि वर्ष 2007 से 2010 के मध्य ड्रग ट्रायल के दौरान कुल 1727 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है. यह भी याचिका का प्रमुख आधार था.


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