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प्रणव मुखर्जी को जीडीपी में सुधार की उम्मीद

प्रणव मुखर्जी को जीडीपी में सुधार की उम्मीद

नई दिल्ली. 7 फरवरी 2012

प्रणव मुखर्जी


केन्द्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि में गिरावट का मुख्य कारण औद्योगिक वृद्धि, विशेष रूप से निवेश वृद्धि में कमी होना है. वित्तमंत्री ने कहा कि खनन क्षेत्र के साथ-साथ निर्माण क्षेत्र में गिरावट के साथ नकारात्म्क वृद्धि ने भी सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि में नरमी को बढ़ावा दिया है.

प्रणब मुखर्जी केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा जारी किये गये वर्ष 2011-12 के सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे. उन्होंने कहा कि यद्यपि चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी के अग्रिम आकलनों के आंकडे हमारी हाल में हुई वृद्धि के अनुभवों के मुकाबले निराशाजनक हैं, फिर भी वर्तमान वैश्विक संदर्भ और विशेष रूप से घरेलू औद्योगिक क्षेत्र में गिरावट को देखते हुए वृद्धि निष्पादन कुल मिलाकर आश्चर्यजनक नहीं है.

केन्द्रीय वित्ति मंत्री ने कहा कि हाल के सप्तांहों में व्यापार विचारों, रुपया विनिमय दर, मुद्रास्फीति में नरमी, रबी फसल बहुत अच्छी होने की संभावना, सेवा क्षेत्र का कामकाज लगातार अच्छा होने के कारण उत्साहजनक संकेत मिले हैं, जो वृद्धि की गति में सुधार लाने में सहायता करेंगे. उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2011-12 के सभी आंकड़े उपलब्ध हो जाएंगे, तो उन्हें सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि संख्या में सुधार होने की आशा है.

केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन ने सकल घरेलू उत्पाद एवं संबंधित राशियों के अग्रिम आकलन जारी किये. वर्ष 2012 के दौरान 2004-5 मूल्यों की कारक लागत पर सकल घरेलू उत्पाद में भी वृद्धि 6.9 प्रतिशत आकलित की गई है, जबकि 2010-11 में यह वृद्धि दर 8.4 प्रतिशत थी. स्थिर मूल्यों पर जीडीपी 5,222,027 करोड़ रुपये तथा सामान्य दर पर 8,279,976 करोड़ रुपये होने का आकलन है. उपक्रम वार जीडीपी वृद्धि कृषि, वानिकी एवं मछली पालन में 2.5 प्रतिशत, उत्पादन उपक्रम में 3.9 प्रतिशत और सेवा उपक्रम में 9.4 प्रतिशत होने का आकलन किया गया है.

हालांकि केंद्रीय सांख्यिकी संगठन ने कहा है कि पिछले वर्ष की वर्ष 2011-12 में देश के कृषि उत्पादन में महज 2.5 प्रतिशत की बढोतरी हो सकेगी. जबकि वर्ष 2010-11 के दौरान कृषि क्षेत्र में 7 प्रतिशत की बढोतरी हुई थी और अब ये आंकड़ा 7 से गिरकर सीधे 2.5 प्रतिशत पर आ गया है.