पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राज्य >बिहार Print | Share This  

कोशी पर बने महासेतु का विरोध

कोशी पर बने महासेतु का विरोध

पटना. 8 फरवरी 2012

कोशी महासेतु


बिहार में कोशी नदी पर बने महासेतु का कई जनसंगठनों ने विरोध किया है. संगठनों का कहना है कि इस सेतु के कारण आम जनता का जीवन खतरे में पड़ गया है. जिस सेतु को विकास का पर्याय बताया जा रहा है, उससे विनाश का खतरा उत्पन्न हो गया है.

राष्ट्रीय जनांदोलनों का समन्वय ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री सी पी जोशी और बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार द्वारा कोशी नदी पर उद्घाटित महासेतु को विनाशकारी बताया है. इस समन्वय संगठन का आरोप है कि पर्यावरण को क्षति पहुंचा, वहां के रहने वाले लोगों को खतरे में डाल, लाखों को विस्थापित कर एवं तमाम अनुशंसाओं को नजरअंदाज कर बनाया गया यह पुल निंदा के लायक है. संगठन ने इस महासेतु का विरोध करने वाले लोगों की आवाज को दबाने के लिये सरकार द्वारा सीपीसी की धारा 107 के तहत सैकड़ों लोगों पर मुकदमा करने की भी भर्त्सना की है.

गौरतलब है कि बिहार की शोक कहे जाने वाली कोशी नदी पर सरकार ने 1885 मीटर लम्बी महासेतु का निर्माण किया है और 9 किलोमीटर आफ्लक्स बांध बना कर इसके चौड़ी धारा को कैद किया है. जबकि वर्ष 2003 में राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग ने शून्य अवरोध पर सेतु निर्माण का निर्णय लिया था, जिसके आधार पर पुणे स्थित सेंटर वाटर एंड पॉवर रिसर्च स्टेशन ने पुल की लम्बाई का अनुमान 10300 मीटर लगाया था.

राष्ट्रीय जनांदोलनों का समन्वय का कहना है कि वर्तमान पुल की डिजाईन पर बिहार सरकार के ही गोकुल प्रसाद की अध्यक्षता वाली समिति ने टिप्पणी की थी कि यह पुल यहाँ के रहने वालों के गले में फांसी के फंदे के सामान है. इस सेतु के बनाये जाने से तटबंधों पर हमेशा दवाब रहेगा और विनाश का खतरा मंडराता रहेगा.

इस महासेतु का विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि अप और डाउन स्ट्रीम में चार प्रखंडों के 11 पंचायत के 64 गाँव के लगभग 20 हजार परिवार के लाखों लोग विस्थापित हो रहे हैं पर उनके विरोध पर सरकार चुप बैठी है.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in