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सेक्स, नैतिकता और मनोरंजन को मिलाएं नहीं

सेक्स, नैतिकता और मनोरंजन को मिलाएं नहीं

मुंबई. 13 फरवरी 2012

कल्कि कोचलिन


फ्रेंच मूल की भारतीय अभिनेत्री कल्कि कोचलिन मानती हैं कि फिल्मों में कहानी के साथ बेहतर सलूक ज़रुरी है. किसी नैतिक कहानी के साथ उसमें अनावश्यक रुप से सेक्स, हिंसा और मनोरंजन को मिलाने से बचना ही चाहिये. क्लिक का कहना है कि आज की तारीख में यह ज़रुरी है कि बॉलीवुड के फिल्म निर्माता व्यवसायिक सिनेमा के बेहतर विकल्प के बारे में विचार करें.

भारतीय फिल्मकार अनुराग कश्यप के साथ विवाह रचाने वालीं कल्कि कोचलिन का अनुभव ऐसा रहा है कि बिना विषय के व्यावसायिक फिल्म बना ली जाती है, जबकि इसके उलट एक एक्शन फिल्म बनाकर, फिल्मकार उसमें उपदेशात्मक ज्ञान देते हुये फिल्म की समाप्ति कर देता है.

अनुराग कश्यप के साथ मिल कर 'देट गर्ल इन येलौ बूट्स' फिल्म की कहानी लिखने वाली कल्कि का कहना है कि फिल्म की जब कहानियां लिखी जाती हैं तो कहानी लिखते समय भी बहुत से लोग अस्पष्ट रहते हैं. कहानी में क्या कुछ होना है, यह कहानी लिखते वक्त भी उन्हें नहीं पता होता है. वे किसी गंभीर विषय वाली कहानी में भी हल्की-फुल्की मसाला चीजें डाल देते हैं. कल्कि का कहना है कि आप अपने हरेक दर्शक को खुश नहीं कर सकते. लेकिन दुर्भाग्य से हमारे यहां फिल्म की कहानी लिखते समय ऐसा ही होता है.

कल्कि के अनुसार दबंग उनकी पसंदीदा फिल्म है. उनकी राय में व्यावसायिक फिल्म बनाने के बाद भी इम्तियाज अली की फिल्में वास्तविकता के करीब होती हैं. देव डी फिल्म से अपने अभीनय की शुरुवात करने वाली कल्कि ने बॉलीवुड में जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, दैट गर्ल इन यलो बूट्स, शैतान, माय फ्रैंड पिंटो जैसी फिल्मों में काम किया है, लेकिन वह यह जोड़ना नहीं भूलतीं कि उन्हें अभी भारतीय सिनेमा को लेकर बहुत सारी चीजें सीखनी हैं.


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