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गिलानी पर अवमानना के आरोप तय

गिलानी पर अवमानना के आरोप तय

इस्लामाबाद. 13 फरवरी 2012

यूसुफ रजा गिलानी


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी के खिलाफ चल रहे अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ आरोप तय कर दिये हैं. यूसुफ रजा गिलानी के खिलाफ 2 पन्नों का आरोप पत्र जारी किया गया. वहीं यूसुफ रजा गिलानी ने तमाम आरोपों से इंकार किया है. अब गिलानी के खिलाफ मुकदमा चलेगा और पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल उनके खिलाफ मुकदमा लड़ेंगे.

इधर यूसुफ रजा गिलानी के वकील ने 24 फरवरी तक जवाब दायर करने का समय मांगा, जिसपर अदालत ने उन्हें 16 फरवरी तक जवाब देने को कहा, जिसके बाद अदालत ने 27 फरवरी की तारीख दी है. हालांकि अदालत ने गिलानी को उस तारीख को मौजूद होने से छूट दी है. यूसुफ रजा गिलानी के खिलाफ चल रहे अवमानना के मामले में सात सदस्यों वाली सुप्रीम कोर्ट के जजों की बेंच ने आरोप तय करते हुये कहा कि यूसुफ रजा गिलानी ने अदालत के निर्देशों की बार-बार अवमानना की.

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने इससे पहले एक चैनल से बातचीत करते हुये कहा था कि अगर अदालत से उन्हें सजा हुई तो वे स्वाभाविक रुप से संसद नहीं रह जाएंगे और अगर सांसद नहीं रह पाये तो प्रधानमंत्री के पद पर रहने का तो सवाल ही नहीं है.

गिलानी ने आसिफ अली जरदारी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर कहा कि राष्ट्रपति संसद का हिस्सा हैं और वह चुने हुए राष्ट्रपति हैं क्योंकि चारों प्रांतीय विधानसभाओं ने उनके समर्थन में वोट दिया था. उस समय किसी को कोई आपत्ति नहीं थी. आसिफ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ राजनीतिक बुनियादों पर मुक़दमे बनाए गए थे और उन पर जो भी आरोप लगे, उन्होंने अदालतों का सामना किया और वह बरी हुए.

गौरतलब है कि पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय खंडपीठ ने प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को 13 फरवरी को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था. अदालत ने कहा था कि गिलानी ने कोर्ट की अवमानना की है.

गिलानी पर आरोप है कि जनरल परवेज मुशर्रफ ने राष्ट्रपति रहते हुये अक्टूबर 2007 में नेशनल रिकंसिलिएशन आर्डिनेंस यानी एनआरओ के तहत हत्या और भ्रष्टाचार का मामला झेल रहे राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों को आम माफी दे दी थी. इस माफी का लाभ वर्तमान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और गृह मंत्री रहमान मलिक समेत कम से कम 8 हजार लोगों को मिला था.

इसके बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता डॉ. मुबासर हसन और वरिष्ठ वकील एम. असलम खाकी ने पाकिस्तान उच्च न्यायालय में याचिका दायर करते हुये कहा कि राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश पूरी तरह से गैर कानूनी है. इसके बाद 2009 में उच्चतम न्यायालय ने एनआरओ को असंवैधानिक करार दिया. इसके बाद से ही आसिफ अली जरदारी के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव अदालत ने बनाया लेकिन प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी ने जरदारी समेत दूसरे राजनेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. उच्चतम न्यायालय का कहना था कि गिलानी स्विस अधिकारियों को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ मनी लांड्रिंग के मामले फिर से खोलने के लिए पत्र लिखें लेकिन गिलानी ने इसका भी पालन नहीं किया. इस पर अदालत ने गिलानी को कड़ी चेतावनी दी थी.

इस मामले में पाकिस्तान उच्चतम न्यायालय की 17 सदस्यीय पूर्ण पीठ ने प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी को अदालत की अवमानना के लिये जिम्मेवार ठहराते हुये उन्हें 19 जनवरी को स्वयं अदालत के सामने पेश होने का आदेश दिया था. जिसके बाद अदालत में पेश हो कर उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है. जिसके बाद अदालत ने माना कि गिलानी अदालत की अवमानना के दोषी हैं.


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