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पुराना संविधान आया तो नेपाल में विद्रोह-प्रचंड

पुराना संविधान आया तो नेपाल में विद्रोह-प्रचंड

काठमांडु. 14 फरवरी 2012

प्रचंड


माओवादी नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड ने कहा है कि अगर नेपाल में राजशाही के दौरान 1990 में लागू किये गये संविधान को फिर से जिंदा करने की कोशिश की गई को उनकी पार्टी के सदस्य विद्रोह कर सकते हैं. सत्तारुढ माओवादी पार्टी में चल रहे विवादों के बीच पार्टी प्रमुख प्रचंड के इस बयान को लेकर नेपाल के राजनीतिक गलियारे में हंगामा मचा हुआ है.

काठमांडू में 17वें जनता संग्राम दिवस के अवसर पर अपने माओवादी साथियों को संबोधित करते हुये प्रचंड ने कहा कि अगर नेपाल के दूसरे राजनीतिक दल शांति और जनसमर्थित संविधान का विरोध करते हैं तो उन्हें मुश्किल झेलना पड़ सकता है. प्रचंड ने कहा कि हम ने जनता के हक में संविधान का मसौदा तैयार किया है. लेकिन कुछ सुधार विरोधी बल इसके खिलाफ साजिश कर रहे हैं.

प्रचंड ने चेतावनी वाले लहजे में कहा कि हमारी पार्टी द्वारा तैयार संविधान के मसौदे के खिलाफ अगर साजिश रची गई तो जनता के विद्रोह के लिए तैयार रहिए क्योंकि हमारी पार्टी यह रास्ता चुन सकती है.

संयुक्त सीपीएन माओवादी के अध्यक्ष प्रचंड से पहले पार्टी के उपाध्यक्ष मोहन वैद्य किरण ने भी कहा था कि नेपाल में आम जनता विद्रोह के लिये तैयार है. प्रचंड ने कहा कि आज के आयोजन का उद्देश्य ही यही है कि हम जनविद्रोह को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को फिर से याद कर सकें. उन्होंने कहा कि माओवादी पार्टी अपने सिद्धांतों पर आज भी कायम है लेकिन प्रतिक्रियावादी ताकतें शांति और संविधान के खिलाफ साजिश रचने में लगी हुई हैं.

प्रचंड ने कहा कि स्थानीय अदालत संविधान सभा का कार्यकाल 27 मई के बाद बढ़ाने के लिये तैयार नहीं है लेकिन मैं अदालत की बात मानने के लिये बाध्य नहीं हूं. मैं केवल जनता की अदालत का निर्णय सुनुंगा.


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