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ईरान पर रोक लगाये भारत-अमरीका

ईरान पर रोक लगाये भारत-अमरीका

वाशिंगटन. 15 फरवरी 2012

अमरीका


इराक, अफगानिस्तान और लिबिया के बाद अमरीका ने ईरान पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के नाम पर तरह-तरह की पाबंदी लगाने वाले अमरीका ने अब भारत से कहा है कि वह ईरान पर दबाव बनाये. भारत में दो दिन पहले हुये ब्लॉस्ट के बाद अमरीका की इस रणनीति को काफी चालाकी भरा कदम माना जा रहा है.

गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप लगाते हुये अमरीका उसे निशाना बनाता रहा है. इससे पहले अमरीका ने इराक पर भी ऐसे ही आरोप लगाये थे. लेकिन इराक में सद्दाम हुसैन की हत्या के बाद भी परमाणु हथियार नहीं मिले. तेल की राजनीति में अपने साम्राज्य का विस्तार करते हुये उसने तीसरी दुनिया के देशों को डराने की नियत से लिबिया में कर्नल गद्दाफी को मार गिराया. विश्व राजनीति पर नजर रखने वाले मानते हैं कि तेल पर अपना अधिकार जमाने के लिये परमाणु हथियार के नाम पर अब अमरीका किसी भी दिन ईरान पर हमला कर सकता है.

ईरान की इस्लामिक रेवॉल्यूशन गार्ड्स कोर के उपाध्यक्ष हुसैन सलामी ने कुछ समय पहले ही कहा था कि ईरान इन दिनों पश्चिमी देशों के हमलों की आशंका में जी रहा है लेकिन वह डरा हुआ नहीं है. सलामी के अनुसार ईरान ने ठान लिया है कि अगर उनके देश पर हमला होगा तो वे चुप नहीं बैठेंगे. इसके लिये ईरान ने जरुरी तैयारी कर ली है. ईरान पर जो भी देश हमला करेगा, उस पर तुरंत जवाबी कार्रवाई की जाएगी.

अमरीका की व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे कार्नी के अनुसार अमरीका चाहता है कि उसके सहयोगी राष्ट्र ईरान पर दबाव बनायें और उसे परमाणु कार्यक्रम से रोकें. हालांकि रणनीति को जानने वाले मानते हैं कि अमरीका के लिये परमाणु कार्यक्रम केवल बहाना है. वह किसी भी तरह से ईरान में अपना कब्जा जमाना चाहता है.

हालांकि भारत सरकार ने इस बारे में कोई भी पहल करने से इंकार कर दिया है. ईरान के साथ कच्चे तेल के व्यापार को लेकर भी भारत का रुख अब तक साफ रहा है और उसने कच्चे तेल व्यापार पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है. अमरीका दौरे में प्रणव मुखर्जी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि ईरान के तेल आयात में कटौती का निर्णय भारत नहीं ले सकता. भारत के लिये यह मजबूरी है कि वह ईरान से व्यापार संबंध बनाये रखे.


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