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बंगाल के लेखक प्रगतिशील नहीं

बंगाल के लेखक प्रगतिशील नहीं

नई दिल्ली. 22 फरवरी 2012 बीबीसी

तस्लीमा नसरीन


विवादास्पद बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने कहा है कि पश्चिम बंगाल के साहित्यकार और बुद्धिजीवी वर्ग के लोग अपने आप को प्रगति के साथ जोड़कर दिखाते तो है लेकिन उनकी सोच प्रगतिशील नहीं है.

बीबीसी बांग्ला संवाददाता सुवोजीत बागची के साथ एक साक्षात्कार में तस्लीमा ने कहा कि एक लेखक तभी मर जाता है जब उससे लिखने का अधिकार छीन लिया जाता है. अपनी विवादित किताब 'द्विखंडित' को कई साल पहले पश्चिम बंगाल में प्रतिबंधित किए जाने पर आश्चर्य जताते हुए तस्लीमा ने कहा कि कोलकाता के साहित्यकार राजनीति के दायरे में आकर काम करने लगे है.

तस्लीमा ने कहा, ''पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने एक झटके में मेरी किताब पर पाबंदी लगा दी थी. पच्चीस लेखकों और बुद्धिजीवियों की समिति ने भी 'द्विखंडित' पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में अपनी समीक्षा दी. इस समीति में सुनील बंधोपाध्याय और शॉंखो घोष जैसे साहित्यकार थे जिनकी मै काफी इज्ज़त करती थी.''

उन्होंने कहा, ''कोलकाता के बुद्धिजीवी और साहित्यकारों के मेरे प्रति ईष्या और द्वेष की भावना देखकर मै अचंभित हुई थी. पश्चिम बंगाल के बुद्धिजीवी अपने को प्रगतिशील दिखाते तो है लेकिन उनकी सोच में कोई विकास नहीं हुआ है. ऐसे में मै तो नहीं कह सकती कि कोलकाता का सही मायनों में विकास हो रहा है.''

भारत में महिलाओं की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए तस्लीमा नसरीन ने कहा कि वो मानती है कि भारत महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश है, खासकर छोटी लड़कियों के लिए.

उन्होंने कहा, ''भारत में महिलाएं सुरक्षित नहीं है. कन्या भ्रूण हत्याओं के मामले में भारत पहले पायदान पर है. भ्रूण हत्याओं के मामले में भारत अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी आगे है. भारत में दहेज हत्याएं, वैश्यावृति, लड़कियों के अवैध खरीद-फरोख्त और घरेलू हिंसा जैसी सामाजिक समस्याए अब भी व्याप्त है. जिन पढ़ी-लिखी लड़कियों से उम्मीद की जाती है कि वो इसके खिलाफ आवाज़ उठाएंगी वो भी चुप ही रहतीं है.''

गौरतलब है कि बांग्लादेश मूल की तस्लीमा नसरीन के पश्चिम बंगाल जाने पर पाबंदी है. हालांकि तस्लीमा भारत में दूसरे राज्यों में आती जाती रहीं है. तस्लीमा का कहना है कि अक्सर उनके लेखों के विरोध में खड़े कट्टरपंथियों ने उन्हें परेशान करने की हरसंभव कोशिश की है. कट्टरपंथियों ने उनके सिर पर ईनाम भी रखा था.हालांकि विरोध के बावजूद भारत में उन्हें आने देने की इजाज़त देने के लिए उन्होंने भारत का शुक्रिया भी अदा किया.


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