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चंद्रिका राय हत्याकांड में पुलिस आपस में उलझी

चंद्रिका राय हत्याकांड में पुलिस आपस में उलझी

भोपाल. 25 फरवरी 2012 (दैनिक छत्तीसगढ़)

चंद्रिका राय


उमरिया के पत्रकार चंद्रिका राय हत्याकांड मामले में जिला पुलिस और पुलिस के प्रदेश प्रमुख के बयानों में विरोधाभास सामने आया है. इन बयानों ने एकबार फिर नया विवाद छेड़ दिया है. उमरिया पुलिस ने बकायदा अपने पुलिस कप्तान मनोहरसिंह झामरा के हस्ताक्षर किया हुआ प्रेस रिलीज तक जारी कर दिया है. इधर, प्रदेश के पुलिस प्रमुख एसके राउत ने कहा है कि पत्रकार हत्याकांड में कई बातें सामने आ रही हैं, लेकिन अभी कोई सबूत नहीं मिल पाया है जिसके आधार पर कहा जा सके कि हत्याकांड का खुलासा कर लिया गया है.

डीजीपी एसके राउत ने दो टूक कहा है कि उमरिया में एसटीएफ प्रमुख संजय चौधरी और लोकल पुलिस के अधिकारी इस हत्याकांड की जांच कर रहे हैं. अभी कोई सबूत हाथ नहीं लगा है. डीजीपी से सवाल किया गया कि उमरिया पुलिस तो कह रही है कि हत्याकांड में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, उन्होंने जुर्म भी कबूल कर लिया है.

इस पर डीजीपी ने साफ कहा कि आरोपी के कहने भर से यह मान लेना कि हत्या इन्हीं ने की है, गलत होगा. जब तक कि आरोपी के बयानों की पुष्टि करता कोई सबूत हाथ न लग जाए. अभी एसडीएफ के प्रमुख संजय चौधरी, लोकल पुलिस के साथ मिलकर हत्याकांड के संबंध में जो बातें सामने आ रही हैं, उसका लिंकअप कर रहे हैं. उसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा.

उमरिया में विशेष कार्य बल ने पत्रकार चंद्रिका राय के परिजनों की हत्या और लोकनिर्माण विभाग के इंजीनियर हेमंत झारिया के पुत्र के अपहरण की गुत्थी सुलझाने का दावा करते हुए इस मामले के छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है और तीन अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है.

पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह झामरा ने बताया कि अपहरणकर्ताओं ने 15 फरवरी को हेमंत झारिया के सात वर्षीय पुत्र अनंत का अपहरण कर पांच करोड़ की फिरौती मांगी थी लेकिन बातचीत के बाद साढ़े पांच लाख रुपये की फिरौती दिये जाने पर समझौता हो गया था.

झामरा के अनुसार अपहरणकर्ताओं में हेमंत के मातहत दैनिक वेतनभोगी अमित भी शामिल था. हेमंत से फिरौती को लेकर मोबाइल फोन पर हुई बातचीत के आधार पर सबसे पहले अमित को पकड़ा गया तथा उसकी सूचना के बाद नगर सैनिक विद्यानिवास तिवारी, सुनील, मनीष कोरी, हरेंद्र सिंह तथा राज को गिरफ्तार किया.

झामरा ने अमित से हुई पूछताछ के हवाले से बताया कि पत्रकार चंद्रिका राय को बच्चे के अपहरण के मामले में उन लोगों के शामिल होने की जानकारी हो गई थी. उन्होंने पुलिस के दवाब में आकर बच्चे को छोड़ दिया. उसके बाद चंद्रिका राय उन्हें पुलिस के सामने भंडाफोड करने की धमकी देकर ब्लेकमेल करने लगा.

झामरा ने बताया कि नगर सैनिक चंद्रिका राय के पड़ोस में ही रहता था. उन लोगों ने पड़ोसी होने के नाते 17 फरवरी की देर रात चंद्रिका राय का दरवाजा खुलवाया और विवाद के बाद चंद्रिका राय, उनकी पत्नी दुर्गा राय, पुत्र जलज और पुत्री निशा की हत्या कर दी. घटना के संबंध में तीन अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है.


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