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पान सिंह तोमर पर बैन की मांग

पान सिंह तोमर पर बैन की मांग

ग्वालियर. 4 मार्च 2012

पान सिंह तोमर


सेना के जवान से डाकू बने पान सिंह तोमर पर बनी फिल्म को लेकर विवाद कम होता नहीं नज़र आ रहा है. इरफान खान की इस फिल्म को पहले तो पान सिंह तोमर के भतीजे ने पैसे के लेन-देन को लेकर विवादों में लटकाने की कोशिश की, अब इस फिल्म में संसद को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की गई है. एक दूसरी याचिका इस बात के लिये लगाई गई है कि पान सिंह तोमर का महिमामंडन किया जा रहा है. इन दोनों याचिकाओं में इस फिल्म के प्रदर्शन पर बैन लगाने की मांग की गई है

पान सिंह तोमर फिल्म को लेकर पहले तो पान सिंह तोमर के भतीजे ने आरोप लगाया कि फिल्म के निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने उसे 45 लाख रुपये देने का वादा किया था, जिससे वह मुकर गये हैं. जैसे-तैसे फिल्म सिनेमाघर तक पहुंची तो चंडीगढ़ में फिल्म पर आरोप लगा कि फिल्म के संवाद संसद का अपमान करते हैं. एक वकील ने स्थानीय न्यायालय में याचिका दायर करते हुये आरोप लगाया है कि फिल्म के मुख्य पात्र इरफान खान ने जिस तरह के संवाद बोले हैं, वह सीधे-सीधे संविधान का अपमान है.

फिल्म अभिनेता इरफान खान के अलावा फिल्म के निर्माता-निदेशक तिग्मांशु धूलिया, रौनी स्क्रूवाला, मैनेजिंग डायरेक्टर और सेंसर बोर्ड को भी इस मामले में पक्षकार बनाया गया है. अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुये उस पर सुनवाई के लिये 9 अप्रैल की तारीख तय की गई है.

इधर ग्वालियर हाईकोर्ट में भी मुरैना के कुछ लोगों ने याचिका दायर करते हुये पान सिंह तोमर के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की है. याचिका लगाने वाले ऐसे लोग हैं, जिनके परिजनों की पान सिंह तोमर ने हत्या की थी. आरोप है कि फिल्म में पान सिंह तोमर का महिमामंडन किया गया है और उसके द्वारा की गई हत्याओं को जायज ठहराने की कोशिश में याचिकाकर्ताओं के रिश्तेदारों को खलनायक बताया गया है. मुरैना जिले के भिडोसा निवासी याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पान सिंह तोमर ने एक याचिकाकर्ता वीरेंद्र सिंह तोमर के पिता जंडैल सिंह और याचिकाकर्ता मानेंद्र सिंह के पिता बाबूसिंह तोमर की हत्या की थी. एक अन्य याचिकाकर्ता दिलीप सिंह के दादा रामेश्वर सिंह को भी पान सिंह तोमर ने मार डाला था. इन सभी लोगों को फिल्म में खलनायक की तरह चित्रित किया गया है.

इस याचिका पर सोमवार को न्यायमूर्ति सुजॉय पाल की एकलपीठ सुनवाई करेगी. माना जा रहा है कि अगर याचिका कर्ता अपना तर्क पेश करने में सफल रहे तो फिल्म पान सिंह तोमर को परदे से उतारा जा सकता है. इसके अलावा याचिकाकर्ताओं को इस मामले में मुआवजा भी देना पड़ सकता है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

ishaan [hada_ishaan@hotmail.com] kota(raj.) - 2012-03-04 07:33:13

 
  किसी को भी सत्य घटनाओं में किसी को खलनायक बनाने का हक नहीं है. इस तरह आप केवल एक पक्ष को सुन पाते हैं और दूसरे पक्ष के साथ अन्याय करते हैं. 
   
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