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बस्तर में टाटा के वन भूमि परिवर्तन को मंजूरी

बस्तर में टाटा के वन भूमि परिवर्तन को मंजूरी

नई दिल्ली. 12 मार्च 2012

टाटा स्टील


केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की समिति ने बस्तर में प्रस्तावित टाटा स्टील के पांच मिलियन टन क्षमता वाले स्टील प्लांट के लिए वन भूमि के डाइवर्सन को अनुमति दे दी है. यह फैसला हाल में हुई वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की वन सलाहकार समिति की बैठक में लिया गया.

स्टील प्लांट प्रोजेक्ट के लिए 105.81 एकड़ वन भूमि का डाइवर्सन किए जाने का प्रस्ताव जगदलपुर फारेस्ट डिवीजन ने कमेटी के पास भेजा था. बैठक के मिनिट्स का हवाला देते हुए सूत्रों ने बताया कि इस तरह के पुराने केसों की समीक्षा के बाद प्रस्ताव को मंजूर कर दिया गया. यह प्रस्ताव जनवरी में भी वन सलाहकार समिति के पास आया था, पर उसमें कई सारी खामियां थीं. कुछ बिंदुओं पर सदस्यों को विस्तृत जानकारी चाहिए थी.

पैनल के सदस्य चाहते थे कि प्रस्ताव में यह बात भी शामिल की जाए कि प्रभावितों का पुनर्वास किस तरह से किया जा रहा है. पिछली बैठक में इस सारे मुद्दों को शामिल करते हुए प्रेजेंटेशन दिया गया. इसमें जमीन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को विस्तार से बताया गया. इस स्टील प्लांट के लिए 2043.45 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है, जिसमें 105.81 हेक्टेयर जमीन वन भूमि है. पुनर्वास योजना के तहत वनभूमि के डाइवर्सन से प्रभावित होने वाले परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी.

इससे पहले टाटा स्टील ने राज्य शासन से जगदलपुर के पास स्टील प्लांट लगाने के बारे में छत्तीसगढ़ शासन के साथ अनुबंध किया था. टाटा स्टील इस समय अपने विस्तार में लगी हुई है. उसने कलिंगनगर में छह मिलियन टन प्रति साल (एमटीपीए) क्षमता वाले स्टील प्लांट पर काम शुरू कर दिया है. इस प्लांट पर कंपनी चार हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी. जमशेदपुर के प्लांट की क्षमता भी इस महीने के अंत तक 2.9 मिलियन टन बढ़ जाएगी. इसके साथ जमशेदपुर प्लांट की क्षमता 10 एमटीपीए हो जाएगी.


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