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अन्ना के अनशन पर देश की निगाह

अन्ना के अनशन पर देश की निगाह

नई दिल्ली. 25 मार्च 2012

अन्ना हजारे


रविवार को देश भर की निगाहें जंतर-मंतर पर लगी हुई हैं. सरकार समेत दूसरे लोग भी एक बार फिर से यह जानने को उत्सुक हैं कि क्या सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को फिर से वैसा ही समर्थन मिलेगा, जैसा पिछले आंदोलनों में मिलता रहा है ? मुंबई में हुये अन्ना के अनशन में कमजोर जन समर्थन के बाद यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण हो गया है.

गौरतलब है कि पिछले साल अप्रैल में अन्ना हजारे ने पहली बार लोकपाल बिल को लागू करने के लिये अनशन किया था. एक बार फिर अन्ना उसी जगह पर अनशन कर रहे हैं. इस अनशन में उन परिवारों के लोग भी शामिल हैं, जिनके परिवारजन भ्रष्टाचार के कथित मामले सामने लाने के कारण मारे गए.

इधर लोकपाल पर सहमति बनाने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी. लेकिन इस बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी थी. लोकपाल बिल लोकसभा में पास हो चुका है लेकिन पिछले साल दिसंबर में रात 12 तक चली लंबी चौड़ी बहस के बावजूद राज्यसभा में पारित नहीं हो सका था. सत्र की अवधि समाप्त होने के कारण राज्य सभा में इसे पारित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो हुई थी.

इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश में कोई भी पार्टी लोकपाल बिल नहीं लाना चाहती है और यही वजह है कि बिल अभी तक लटका हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का व्हिसिल ब्लोअर प्रोटेक्शन बिल किसी काम का नहीं है. अगर जनलोकपाल होता तो मध्य प्रदेश में ईमानदार आईपीएस की हत्या नहीं होती.


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