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14 करोड़ की घूस की पेशकश थी-वीके सिंह

14 करोड़ की घूस की पेशकश थी-वीके सिंह

नई दिल्ली. 26 मार्च 2012

वीके सिंह


उम्र विवाद के कारण चर्चा में आये भारतीय सेना के अध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने यह कह कर सनसनी फैला दी है कि उपकरणों की बिक्री से जुड़े एक लॉबिस्ट ने उन्हें 14 करोड़ रुपए की रिश्वत का प्रस्ताव दिया था. जिन वाहनों के लिये उन्हें रिश्वत के प्रस्ताव दिये गये थे, वैसे ही वाहन सेना में पहले से ही अधिक कीमत पर खरीदे गये थे.

द हिंदू अखबार के साथ बातचीत में भारतीय सेना के अध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने कहा कि एक लॉबिस्ट ने मुझे 14 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की कोशिश की. वो खराब क्वालिटी के 600 वाहनों की खरीद के लिए सेना की मंजूरी चाहता था. ऐसे ही सात हज़ार वाहन सेना में इस्तेमाल हो रहे हैं, महंगे दामों ये खरीदे गए थे लेकिन इस पर कोई सवाल नहीं पूछा गया. मैं इस व्यक्ति की जुर्रत देखकर दंग रहा गया.

जनरल वीके सिंह ने दावा किया कि उन्होंने ये बात रक्षा मंत्री को भी बताई और कहा था कि अगर उन्हें लगता है वे मिस्फिट हैं तो वे जाने के लिए हैं.

गौरतलब है कि उम्र विवाद से नाराज भारतीय सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. जनरल वीके सिंह ने अपनी उम्र को लेकर रक्षा मंत्रालय से शिकायत की थी. जिसमें उन्होंने उनकी जन्म की तारीख 10 मई,1951 मानने की बात कही थी. उन्होंने इसके पक्ष में 21 दस्तावेज पेश किये थे, जिनमें उनकी जन्मतिथि 10 मई 1951 थी. लेकिन सेना के एक दस्तावेज में उनकी जन्म की तारीख 10 मई 1950 दर्ज थी, जिसके अधार पर इस साल मई में उन्हें सेवानिवृत करने की तैयारी चल रही थी. इस मामले में उच्चतम न्यायालय तक मामला गया था.

जनरल वीके सिंह ने अपनी जन्मतिथि विवाद पर कहा कि जन्मतिथि का विवाद जानबूझकर खड़ा किया गया है और इसके लिए पैसे का लेन देन भी हुआ. उनका ये भी कहना था कि इनमें से कुछ लोग सेना में कार्यरत हैं और कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं.

जनरल वीके सिंह ने कहा कि जब आप सरकारी सेवा शुरु करते हैं तो 10वीं के प्रमाण पत्र को ही माना जाता है. वहाँ मेरे जन्म का साल 1951 है. इस विवाद को उठाने में खास तरह की लॉबी ने काम किया- आर्दश लॉबी, उपकरण बेचने वालों की लॉबी. उन्हें समझ आ गया था कि हम उनके खराब उपकरण नहीं लेंगे.

देश में नक्सली या माओवादी हिंसा को लेकर उन्होंने कहा कि ये समस्या इतनी बड़ी हो गई है क्योंकि हमने उस यहाँ तक बढ़ने दिया है. इसे राजनीतिक, सामाजिक और विकास के स्तर पर लड़ना होगा. सेना को अपने ही लोगों के साथ नहीं लड़ना चाहिए. जनरल सिंह ने कहा कि हम माओवादियों को पृथकतावादियों के तौर पर नहीं देखते.


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