लड़कियों पर भरोसा करे भारतीय समा

लड़कियों पर भरोसा करे भारतीय समाज


खेलों के लिए सुविधा के साथ हौसला भी जरुरी

संतोष यादव

ये सच है कि पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी हर क्षेत्र में तरक्की की है. खेल और पर्वतारोहण में पीटी उषा, बछेंद्री पाल से लेकर सानिया मिर्जा तक कई नाम हैं जो कामयाबी की रोशनी से सराबोर है. किरण बेदी और नफीसा अली जैसे कुछ नाम तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने खेल और अन्य क्षेत्रों में कामयाबी हासिल करने के बाद दूसरे क्षेत्र में भी बुलंदी के झंडे गाड़े हैं.


खेल की दुनिया में पिछले छह दशक में महिलाओं की तरक्की संतोषजनक मानी जा सकती है लेकिन सच तो ये है कि हमारा समाज महिलाओं को थोड़ा और सहयोग करे तो महिलाएं बुलंदियों के आसमान में देश का नाम ऊंचा कर सकती हैं.


देश का सामाजिक परिवेश बदल रहा है लेकिन आज भी अपने यहां लड़कियों को उस उम्मीद की नजर से नहीं देखा है, जिस उम्मीद से हम परिवार के लड़कों को देखते हैं. लड़कियां भी बेहतर कर सकती हैं, घरवालों को लड़कियों पर विश्वास करना पड़ेगा.

लड़कियों को माहौल नहीं मिलता
लड़कियों के प्रति हमारी सोच कई भावनाओं को उभरने के पहले ही रोक देता है. आप उन लड़कियों की पीड़ा का अंदाजा लगा सकते हैं, जिनके मन में कामयाबी हासिल करने की हसरत है. जिनमें आगे बढ़ाने की चाहत है लेकिन उन्हें वो माहौल नहीं दिया गया, जिससे उनकी हसरत पूरी हो. हर शख्स को आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए.
लड़कियों को अक्सर इसलिए अवसर नहीं मिल पाता है कि उन्हें आखिरकार दूसरे घरों में जाना है. और शादी के बाद जब दूसरे घरों में जाती हैं, तो उन्हें ऐसी जिम्मेदारी से बांध दिया जाता है कि उनका दायरा घर के अंदर ही रहे. घर-परिवार की जिम्मेदारी चूंकि एक अहम और बड़ी जिम्मेदारी होती है, इसलिए महिलाएं हसरत होने के बावजूद अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल नहीं कर पातीं.

शिक्षा जरुरी
खेल हो या कोई और क्षेत्र, महिलाओं की तरक्की के रास्ते में जो सबसे बड़ी दिक्कत है, वो है शिक्षा. देश के ज्यादातर घरों में लड़कियों को उस शिक्षा का हकदार नहीं माना जाता, जो लड़कों को दी जाती है. सबसे पहले लड़कियों को अच्छी शिक्षा दी जानी चाहिए और उसके बाद उनकी प्रतिभा को पहचान करते हुए उन्हें तरक्की के अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए.


मैंने एवरेस्ट की चोटी पर भारतीय झंडा लहराया तो उसके पीछे एक जज्बा, एक संकल्प, एक दृढ़ इच्छा शक्ति थी. जिस क्षेत्र में भी महिलाओं को आगे आना हो, उसके लिए सुविधा के साथ-साथ हौसला भी ज़रुरी है.


ये सच है कि खेल के क्षेत्र में जरुरी सुविधाओं का घोर अभाव है और हमारी उम्मीद भी ज्यादा है लेकिन खेल से जुड़े हर मामले में हम सरकार की ओर देखने लग जाते हैं. कई देशों में हालत ये है कि खिलाड़ियों को सरकार के साथ-साथ अपना पैसा खर्च करना पड़ता है. हमें भी इस दिशा में नए तरीके से सोचने की जरुरत है.