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राजोआना को माफी पर भड़के केपीएस गिल

राजोआना को माफी पर भड़के केपीएस गिल

नई दिल्ली. 30 मार्च 2012

केपीएस गिल


पंजाब के विवादास्पद पुलिस महानिदेशक केपीएस गिल का कहना है कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे बलवंत सिंह राजोआना को माफी दिये जाने के पक्ष में नहीं हैं. गिल का कहना है कि राजोआना ने जो काम किया है, उससे पंजाब के विकास और राजनीतिक माहौल को काफी नुकसान पहुंचा है.

केपीएस गिल ने बीबीसी के अतुल संगर से बातचीत में कहा कि इस षड्यंत्र में मुख्य एक्टर, जो पुलिस ड्राइवर दिलावर सिंह था, वो वहीं मारा गया. बाद में हमें पता चला कि वो मेरी गाड़ियों के काफिले में भी घुस चुका था, लेकिन मेरे सुरक्षा कर्मचारियों ने उसे बाहर निकाल दिया. अचरज की बात है कि उस पर बाद में किसी ने नजर नहीं रखी. बेअंत सिंह की हत्या के बाद पंजाब के राजनीतिक माहौल और विकास पर जो असर पड़ा, उसे देखते हुए राजोआना किसी रहम के हकदार नहीं है. मैं खुद जानता हूँ कि अमरीका के कई लोग पंजाब में निवेश करने आ रहे थे लेकिन इस घटना के बाद वे पीछे हट गए.

गिल के अनुसार ये कहना बिलकुल उचित नहीं है कि इस न्यायिक आदेश का पालन करने से पंजाब में स्थिति बिगड़ सकती है. जो चरमपंथ-समर्थक गुट हैं वो तकरीबन खत्म हो चुके हैं. इस बार चुनावों में तो उनका कोई भी व्यक्ति निर्वाचित तक होकर नहीं आया है. वो केवल खुद को जीवित रखने के लिए ऐसे मुद्दे उठाते हैं.

केपीएस गिल ने एक अनुभव साझा करते हुये कहा कि हाल में चंडीगढ़ में मेरे सामने एक अजीब थीसिस रखा गया कि राजनीतिक नेता की हत्या किसी अन्य हत्या से कम बड़ा अपराध है. ये मानसिकता चरमपंथ-समर्थक गुटों और तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के दिमाग में घर कर चुकी है. अगर आप पंजाब को देखें तो इन संगठनों - ह्यूमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल की भूमिका की जांच होनी चाहिए. ये लोग पंजाब में इतने साल क्या करते रहे हैं. इन लोगों ने एक बड़ा अभियान चलाया जिसमें वकील मिल गए, कुछ पत्रकार मिल गए, अमरीकन दुतावास मिल गया...वो ये नहीं जानते थे कि ये लोग यानी चरमपंथी देश की सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा हैं.

गौरतलब है कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी पर केंद्र सरकार ने रोक लगा दी है. बलवंत सिंह को 31 मार्च को फांसी दी जानी थी. इस फांसी के मुद्दे पर पूरे पंजाब में प्रदर्शन और बंद का माहौल बना हुआ है. कई इलाकों में धारा 144 लागू है.

बलवंत सिंह राजोआणा के फांसी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें दया याचिका सौंपी, जिसे राष्ट्रपति ने विचारार्थ गृह मंत्रालय को प्रेषित कर दिया. इसके बाद इस फांसी पर याचिका के निपटारे तक रोक लगा दी गई है. पंजाब सरकार समेत कई संगठनों ने मांग की है कि बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी की सजा को रद्द किया जाये. पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल ने शिरोमणि अकाली दल की बैठक में तय किया था कि बलवंत सिंह राजोआणा को किसी भी कीमत पर पंजाब में फांसी नहीं दी जाएगी.


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