पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

लोकपाल बन जाएगा भष्मासुर

लोकपाल बन जाएगा भष्मासुर

नई दिल्ली. 1 अप्रैल 2012

मार्कंडेय काटजू


भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मार्कडेय काटजू का कहना है कि संसद में लोकपाल को लेकर जो विधेयक पेश किया गया है, वह भस्मासुर बन कर भ्रष्टाचार को और बढा सकता है. उन्होंने संसद से आग्रह किया है कि वह लोकपाल विधेयक को और विचार के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजे, ताकि भ्रष्टाचार की जांच के लिए काम करने योग्य तंत्र तैयार किया जा सके.

न्यायमूर्ति काटजू ने कहा कि मौजूदा स्वरूप में विधेयक एक समानांतर नौकरशाही तैयार करेगा, जो 'भस्मासुर' बन सकता है. उन्होंने कहा कि इससे भ्रष्टाचार दोगुना या तीन गुना तक बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि जन लोकपाल और सरकारी लोकपाल दोनों विधेयकों में प्रधानमंत्री से लेकर चपरासी तक देश के करीब 55 लाख कर्मचारियों के काम पर निगरानी रखने का प्रावधान किया गया है. इनमें अकेले 13 लाख रेलवे के कर्मचारी हैं.

उन्होंने पूरी प्रक्रिया को लेकर कहा कि एक लोकपाल अकेले इतनी शिकायतें निपटा नहीं सकता. इसके लिए हजारों लोकपाल की आवश्यकता होगी. मुमकिन है कि इसके लिए 50 हजार लोकपाल की जरूरत पड़े. सभी को वेतन, आवास, दफ्तर और कर्मचारी उपलब्ध करवाने होंगे. ऐसे में उनके भ्रष्ट नहीं होने का गारंटी कैसे ली जा सकती है.

न्यायमूर्ति काटजू ने कहा कि भारत में निम्न स्तर की नैतिकता को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि उनमें से बढ़ी संख्या में ब्लैकमेल करने वाले हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि जंतर मंतर या रामलीला मैदान पर 'भारत माता की जय' और 'इंकलाब जिंदाबाद' कहने से भ्रष्टाचार की सारी समस्याओं का हल संभव नहीं है.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in