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बर्मा में सू ची ने लहराया परचम

बर्मा में सू ची ने लहराया परचम

म्यांमार. 1 अप्रैल 2012 बीबीसी

आंग सान सू ची


बर्मा में आंग सान सू ची की पार्टी का कहना है कि सू ची संसद के लिए हुए उपचुनावों में जीत गई हैं. उपचुनावों में 45 सीटों के लिए मतदान हुआ था और उसके तुरंत बाद मतगणना हुई थी. हालांकि अभी अधिकारियों ने सू ची की जीत की पुष्टि नहीं की है लेकिन पार्टी का कहना है कि सू ची को जीत मिली है. बर्मा में आंग सान सू ची की पार्टी का कहना है कि सू ची संसद के लिए हुए उपचुनावों में जीत गई हैं.

उपचुनावों में 45 सीटों के लिए मतदान हुआ था और उसके तुरंत बाद मतगणना हुई थी. हालांकि अभी अधिकारियों ने सू ची की जीत की पुष्टि नहीं की है लेकिन पार्टी का कहना है कि सू ची को जीत मिली है. कहने को केवल 45 सीटों पर ही मतदान हुआ है लेकिन इन उप-चुनावों को बर्मा की राजनीतिक सुधारों की यात्रा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है. ये चुनाव सेना समर्थित सरकार के सत्ता में आने के एक साल बाद हुए हैं.

अगर ऐसा माना जाता है कि ये चुनाव निष्पक्ष तरीके से हुए हैं तो यूरोपीय संघ कह चुका है कि वो बर्मा पर से कुछ प्रतिबंध हटा सकता है. यानी इन चुनावों को लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति बर्मा सरकार की प्रतिबद्वता का संकेत माना जाएगा. आंग सान सू ची साल 1990 से अपने घर में नज़रबंद रही थीं. उसी वर्ष उनकी पार्टी ने चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल किया था. लेकिन सेना ने उनकी पार्टी को सत्तारूढ़ नहीं होने दिया था.

सू ची की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी ने साल 2010 में हुए चुनावों का बहिष्कार किया था. उन चुनावों के बाद सैन्य प्रशासकों के स्थान पर सेना समर्थित राष्ट्रपति थीन सेन की सरकार अस्तित्व में आई थी. इन चुनावों के बाद नवंबर 2010 में आंग सान सू ची को नज़रबंदी से रिहा कर दिया गया था. वे कावमू नाम के ग्रामीण कस्बे से चुनाव लड़ी हैं. साल 2008 में रंगून और इरावदी डेल्टा में आए नर्गिस नाम के चक्रवात में कावमू सबसे अधिक प्रभावितों होने वाले कस्बों में से एक था.

ये लगभग तय है कि उपचुनावों के बाद वे संसद में पहुंचेंगीं और उनकी पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी बर्मा आधिकारिक विपक्ष का स्थान लेगी.
ये उपचुनाव ऐसे दौर में हो रहे हैं जब पश्चिमी देश एक बार फिर बर्मा के साथ संबंध स्थापित कर रहे हैं.


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