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कोयला घोटाले में फंसी रमन सरकार

कोयला घोटाले में फंसी रमन सरकार

रायपुर. 6 अप्रैल 2012

रमन सिंह


छत्तीसगढ़ की रमन सरकार द्वारा निजी कंपनियों को कोल ब्लॉक आवंटन में लाभ पहुंचाते हुये हजार करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का मामला सामने आया है. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग रिपोर्ट में इस रहस्योद्घाटन के बाद विपक्ष ने पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है और रमन सिंह से इस्तीफे की मांग की है.

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग ने अपनी एक रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम द्वारा कोयला खनन के पट्टे जारी करने में बरती गई अनियमितता की वजह से 1052.2 करोड़ रुपए का घाटा होने का अनुमान जताया है.

कैग ने वर्ष 2010—11 की अपनी रिपोर्ट में बताया है कि छत्तीसगढ़ में निजी क्षेत्र की कंपनी को कोल ब्लाक का दोषपूर्ण आबंटन किया गया है,जिसके कारण सरकारी खजाने को दस अरब रुपये से भी अधिक का नुकसान हुआ है. तीन अप्रैल को छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस रिपोर्ट के पेश होने के बाद हड़कंप मच गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने 32 साल के सबसे कम मूल्य पर कंपनी को कोयला क्षेत्र का आबंटन कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया है.

छत्तीसगढ़ के महालेखाकार पीसी मांझी इसे एक गंभीर मामला मानते हैं. वे पूरे मामले पर कुछ इस तरह प्रकाश डालते हैं- '' खनिज विकास निगम ने भटगांव-2 कोयला खदान को 552 रुपए प्रति मिट्रिक टन दर की रॉयल्टी पर तो समान क्वालिटी के कोयले वाले भटगांव-2-विस्तार का पट्टा 129.6 रुपए प्रति मिट्रिक टन की दर पर दिया. यह कोयले की सामान्य दर से भी कम थी. ''

मांझी बताते हैं कि भटगांव-2 कोल ब्लॉक के लिए केवल दो कंपनियों ने ही टेंडर डाले थे. लेकिन खनिज विकास निगम ने नियमों को दरकिनार करते हुए फिर से टेंडर नहीं बुलाये. और जब ऑडिट को लेकर आपत्ति हुई तो निगम प्रबंधन ने कहा कि कोल ब्लाक में डी क्वालिटी का कोयला ही है और आबंटन कोयला सलाहकार के कल सलाह पर हुआ है.जबकि केंद्रीय भूवैज्ञानिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि कोल ब्लाक में ‘अ’ से ‘स’ श्रेणी तक का कोयला है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भटगांव-2 देश की अत्यंत ही उच्च श्रेणी के कोयले की खदान है इसलिए इनके आबंटन में पूरी सावधानी बरतनी चाहिये थी. इसे बड़ी बोली के बाद ही आबंटित किया जाना चाहिये था.लेकिन खनिज विकास निगम ने ऐसा नहीं किया. जो संदेह को जन्म देता है.

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक विद्युत पारेषण कंपनी में समन्वय नहीं होने के कारण 23.96 करोड़ रुपए की हानि हुई है जबकि 190.68 करोड़ रुपए का नुकसान विभिन्न विभागों में अनुचित व्यय और अधिक भुगतान के कारण हुआ है.

420.57 करोड़ रुपए का घाटा महंगी बिजली खरीदने के कारण हुई है. वहीं वाणिज्यिक कर समेत अन्य विभागों में कर नहीं वसूलने के कारण 826.26 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है. यह व्यापारियों को अनुचित लाभ देने की नीयत से किया गया है. खाद्य और कृषि विभाग, नगरीय प्रशासन, आयुष, पीडब्ल्यूडी में भी जमकर अनियमितता हुई है.

कैग की रिपोर्ट से छत्तीसगढ़ विकास निगम के अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल सहमत नहीं है. वे कहते हैं कि टेंडर की प्रक्रिया नियमानुसार की गई है. इसमें कुछ भी गलत नहीं हुआ है. देश की बड़ी कंपनियां इसमें शामिल हुई थी और सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को कोल ब्लाक आबंटित किया गया है. जिसका फैसला निगम के बोर्ड ने किया है.

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री जोगी कैग रिपोर्ट के आधार पर पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की हैं. उन्होंने राज्य सरकार पर दुर्लभ व उच्च श्रेणी के कोयले को सस्ते दरों में बेचकर राज्य को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है. जोगी का कहना है कि राज्य में भाजपा सरकार खुलेआम भ्रष्टाचार कर रही है.जिस तरह से अन्य राज्यों में कैग रिपोर्ट के आधार पर जांच कर कार्रवाई होती है, उसी तरह छत्तीसगढ़ में भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.चूंकि मामला बेहद गंभीर है इसलिए दोषियों को सीधे जेल भेज देना चाहिए. जोगी का आरोप है कि महंगी बिजली खरीदने के कारण राज्य को 500 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया गया है.

दिलचस्प यह है कि कैग ने खनिज विकास निगम के साथ ही राज्य के अन्य सरकारी निगमों के खिलाफ भी अपनी रिपोर्ट में प्रतिकूल टिप्पणियां की हैं. जिसकी वजह से राज्य सरकार की काफी किरकिरी हो रही है. विपक्ष को बैठे-बिठाये एक बड़ा मुद्दा मिल गया है.


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