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इंदिरा की तारीफ में संघ के कसीदे

इंदिरा की तारीफ में संघ के कसीदे

नई दिल्ली. 8 अप्रैल 2012

इंदिरा गांधी


आरएसएस ने एक बार फिर आतंकवाद के मुद्दे पर इंदिरा गांधी की तारीफ के कसीदे काढ़ते हुये कहा है कि भारत में आतंकवाद से लड़ने का हौसला अकेले इंदिरा गांधी में ही था. संघ की राय है कि ओडीशा में नक्सलियों का मांग को स्वीकार करने से स्थितियों में सुधार नहीं आएगा. आरएसएस ने अपने मुखपत्र आर्गेनाइजर के नये अंक के संपादकीय में इंदिरा गांधी के साथ भाजपा सरकार में मंत्री रहे जसवंत सिंह की तुलना करते हुये कंधार कांड में आतंकियों को छोड़े जाने की कड़ी आलोचना की गई है.

ओडीशा में माओवादियों द्वारा इतालवी नागरिक और विधायक के मुद्दे पर संपादकीय में कहा गया है कि इन वारदातों से नक्सली न केवल अपने साथियों को मुक्त करा रहे हैं बल्कि उन्हें इनकी आड़ में अपनी ताकत बढ़ाने और संगठित होने का भरपूर मौका भी मिल रहा है. ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए हम लोगों के पास एक सुविचारित नीति होनी जरूरी ताकि हम यह संदेश दे सकें कि भारत एक कमजोर देश नहीं है. अगर हम ऐसा करने में नाकाम रहे तो हमारा आतंकविरोधी अभियान मजाक बनके रह जायेगा.

संपादकीय में कहा गया है कि अपहरण और बंधकों के बदले कैदियों की अदला-बदली के लिए केंद्र के साथ-साथ राज्यों की अपनी कोई सुनिश्चित नीति नहीं है.1984 में इंदिरा गांधी ने मकबूल बट को फांसी देने में कोई नरमी नहीं दिखाई जबकि आतंकी सरकार पर दबाव बनाने के लिए भारतीय राजयनिक रवींद्र म्हात्रे को बंधक बनाये हुए थे. हालांकि आतंकियों ने बट की फांसी के बाद म्हात्रे की हत्या कर दी थी. लेकिन उसके बाद से ऐसा कोई मौका देखने को नहीं मिला जब सरकार ने ऐसे मामलों में दृढ़ता दिखाई हो.

आर्गेनाइजर के संपादकीय में कंधार कांड का जिक्र करते हुए कहा गया है बंधक विमानयात्रियों को मुक्त कराने के लिए तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह खुद कश्मीरी आतंकियों को अपने साथ लेकर गये. इस लेख में 1989 में गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद को अगवा किये जाने का जिक्र करते हुए तत्कालीन सरकार की लाचारी का उल्लेख किया है.


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