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छत्तीसगढ़ कोल घोटाले में संचेती का नाम

छत्तीसगढ़ कोल घोटाले में संचेती का नाम

नई दिल्ली. 9 अप्रैल 2012. सुनील शर्मा

अजय संचेती


छत्तीसगढ़ में हुये कोल घोटाले की धमक बढ़ती जा रही है. बिना उद्योग के भाजपा अध्यक्ष नीतीन गडकरी के कहने पर उनके मित्र संचेती ब्रदर्स को कोल ब्लॉक आवंटित करने का मुद्दा गहराता जा रहा है लेकिन छत्तीसगढ़ में अभी भी अधिकांश लोग संचेती ब्रदर्स से अनभिज्ञ हैं. छत्तीसगढ़ में कोल ब्लाक आबंटन में एक हजार करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले में रमन सरकार पर जिस कंपनी को लाभ पहुंचाने का आरोप लगा है, उस कंपनी का नाम है एसएमएस इन्फ्रास्ट्रक्चर. नागपुर की इस कंपनी के मालिक हैं संचेती ब्रदर्स. यानी अजय संचेती, अभय संचेती और आनंद संचेती.

अजय संचेती का पूरा नाम है अजय शांतिकुमार संचेती,एसएमएस इंफ्रास्ट्रक्चर नागपुर के संयुक्त मैनेजिंग डायरेक्टर और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी के बेहद करीबी. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और हाल ही में महाराष्ट्र से राज्यसभा के लिए निर्वाचित. पार्टी ने इन्हें झारखंड से राज्य सभा में भेजने की कोशिश पहले भी की थी लेकिन विरोध के कारण ऐसा नहीं हो सका लिहाजा महाराष्ट्र से सदस्य बनाया गया.

एक और दिलचस्प बात. अजय संचेती का नाम देश के 'आदर्श' घोटाले में भी सामने आया था. आदर्श सोसायटी में उनके ड्राइवर के नाम पर फ्लैट होने की खबर आई थी. इस घोटाले में उनके साले के भी लिप्त होने की सूचना मिली थी.
ये वही संचेती हैं, जिनकी कंपनी एसएमएस इंफ्रास्ट्रक्चर को छत्तीसगढ़ के दुर्ग-राजनांदगांव बाईपास के निर्माण मामले में जमा 17.35 करोड़ रुपए को अवैध तरीके से वापस कर दिया गया था. इससे भी छत्तीसगढ़ को भारी नुकसान उठाना पड़ा था.

संचेती का ताल्लुक संघ से है और ये भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के बेहद करीबी हैं. इतने करीबी कि इनके लिए गडकरी भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, देश के सबसे धनवानों में से एक मुकेश अंबानी की बात मानने से भी इंकार कर देते हैं.

गौरतलब है कि मुकेश अंबानी ने अपने साथी वीरेन शाह के पुत्र राजेश शाह को महाराष्ट्र से राज्य सभा में भेजने आड़वाणी की जमकर चिरौरी की. लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.गडकरी और संचेती का करीबी होना मुकेश अंबानी पर भारी पड़ गया और आडवाणी राज्य सभा उम्मीदवारों के चयन की बैठक में शाह को राज्य सभा सदस्य बनाने की बात को दमदारी के साथ नहीं उठा सके.

गडकरी शाह की जगह अजय संचेती को राज्य सभा में लाने कामयाब हो गये. राज्य सभा सदस्य के लिए पर्चा भरने वाले सभी 12 उम्मीदवारों में सबसे अधिक 76.89 करोड़ रुपए की संपत्ति होने की जानकारी संचेती ने ही दी थी. दरअसल तब ही गडकरी और संचेती परिवार के बीच के रिश्ते पहली बार लोगों के सामने खुलकर आये लेकिन अंदरूनी तौर पर इनके बीच रिश्ता पहले से ही काफी मजबूत रहा है. संचेती गडकरी के अलावा राजनाथ सिंह के भी करीबी माने जाते हैं.

वर्तमान में संचेती को लोग भले ही उद्योगपति,बिजनेस मेन, कारपारेट किंग या किसी भी नाम या ओहदे से जानते हों लेकिन एक समय संचेती का नाम देश के आर्थिक अपराधियों की सूची में शामिल रहा है. खुद को झारखंड का किंग मेकर बताने वाले संचेती का अतीत कई सवाल खड़े करता है.

जानकारों की मानें तो संचेती सड़कों के ठेकेदार हैं और महाराष्ट्र के लोक निर्माण मंत्री रहते हुए गडकरी ने इन्हें काफी ठेका दिलवाया था.इनके नाम सड़के बनाने का रिकॉर्ड भी है. जानकार तो यह कहते हैं कि तब गडकरी की कृपा से एसएमएस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को कई ठेके मिले और कमाये गये रुपए का एकाध हिस्सा यदि झारखंड में लगा दिया तो कौन सा बड़ा अहसान कर दिया.

संघ परिवार के साथ ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के साथ संचेती के गहरे रिश्ते होने की चर्चा होती रही है.संचेती ब्रदर्स देश में कई पावर प्लांट भी लगा रहे हैं और ऐसा भी माना जाता है कि छत्तीसगढ़ के निर्माणाधीन बिजली घरों में भी इनकी भागीदारी है.
दरअसल कुछ साल पहले गडकरी ने संचेती का परिचय रमन सिंह से करवाया था. एक बार जब गडकरी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर आये तो उनके साथ संचेती के अलावा एक कोयला खदान का मालिक भी था.तब संचेती ने उस खदान मालिक को रमन सिंह से मिलवाया. और गडकरी की मौजुदगी में उनका काम करने कहा.

किसी समय संचेती और उनकी कंपनी पर आयकर का छापा पड़ा था. अफसरों को वर्धमान सहकारी बैंक के एक बड़े आर्थिक घपले का पता चला था. तब अफसरों ने आशंका जताई थी कि संचेती और उनके परिवार ने काले धन की हेराफेरी के लिए बैंक का गलत तरीके से इस्तेमाल किया है .जांच में इस बात का राज खुला कि संचेती परिवार के लोग और उनके कर्मचारी रोज वहां मोटा पैसा जमा करते थे और अगले दिन या एक दो दिन के भीतर डिमांड ड्राफ्ट के द्वारा उस पैसे को आहरित कर लेते थे. महज आठ से दस महीने के भीतर 40 करोड़ रुपए काले से सफेद किये गये लेकिन संचेती को कुछ भी नहीं हुआ.

हालांकि अजय संचेती पीढ़ियों से संघ परिवार के साथ जुड़े है. महाराष्ट्र के बुलढाना जिले के मलकापुर कस्बे के रहने वाले संचेती के दादा भी संघ के सदस्य थे और पिता स्वर्गीय शक्ति कुमार संचेती भी संघ से जुड़े थे और संचेती के चाचा चैनसुख संचेती मलकापुर से भाजपा के विधायक हैं. लेकिन संचेती ने व्यापार के लिए संघ के अलावा सभी राजनैतिक दलों से संबंध कायम किये. यही कारण रहा कि सड़क बनाने के साथ ही इन्होंने बिजली घर भी बनाये.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

सुनील गुप्ता [sunil.chirmiri@gmail.com] चिरमिरी ,कोरिया ( छ.ग. ) - 2012-04-09 17:24:12

 
  दरअसल खनन माफिया जिसमे कोल माफिया भी शामिल है ,वन माफिया , भू माफिया ये एक खास तरह के अपराधी है जिन्हें शासन व् विपक्छ दोनों का समान रूप से प्रश्रय प्राप्त होता है और इन मामलों में विपक्छ की भूमिका सिर्फ एक अच्छे अभिनेता की तरह विरोध का नाटक करने तक सीमित होती है .शायद यही वजह है जिसकी वजह से ये सम्पूर्ण राष्ट्र और छत्तीसगढ़ का लहू चूसने में लगे है
 
   
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