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खलील चिश्ती को 20 साल बाद जमानत

खलील चिश्ती को 20 साल बाद जमानत

अजमेर. 9 अप्रैल 2012 बीबीसी

खलील चिश्ती


सुप्रीम कोर्ट ने 81 वर्षीय पाकिस्तान नागरिक डॉक्टर खलील चिश्ती को जमानत दे दी है. उन पर वर्ष 1992 में राजस्थान के अजमेर शहर में हत्या का अभियोग है जिसके लिए उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली हुई है. लेकिन उन्हें अजमेर शहर छोड़कर जाने की अनुमति नहीं दी गई है.

डॉक्टर खलील चिश्ती पर अजमेर में 18 साल मुकदमा चला और बाद में उन्हें आजीवन कारावास की सजा हो गई. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी कि वो अस्सी वर्ष के हो गए हैं और पिछले 20 वर्षों से जेल में हैं इसलिए उन्हें जमानत दे दी जाए. उन्होंने अदालत से ये कहा था कि उन्हें अपने घर यानी पाकिस्तान के कराची शहर जाने दिया जाए.

अदालत ने कहा डॉक्टर चिश्ती से अपना पासपोर्ट जमा कराने के बाद अपने घर जाने पर एक नई अर्जी दाखिल करने को कहा है. उस अर्जी की सुनवाई तक उन्हें अजमेर ना छोड़ने की हिदायत दी गई है.

पाकिस्तानी नागरिक डॉक्टर ख़लील चिश्ती को अदालत ने 31 जनवरी 2011 को अजमेर में 1992 में हुए एक कत्ल के अभियोग में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी. डॉक्टर चिश्ती का जन्म अजमेर में ही हुआ था, जहां पर उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा भी हासिल की थी.

डॉक्टर चिश्ती के रिश्तेदारों और मानवाधिकार संस्थाओं ने उच्च न्यायालय के फ़ैसले का स्वागत किया है. पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता और पूर्व मंत्री अंसार बर्नी ने कहा है कि वो जल्द ही भारत आकर खलील चिश्ती को उनके घर कराची जाने देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डालेंगे.

अंसार बर्नी ने बीबीसी को बताया, "मैं इस फ़ैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करता हूं. अब मैं बुधवार को भारत आ रहा हूं ताकि हम सुप्रीम कोर्ट में उन्हें कराची जाने देने की अर्जी दाखिल कर सकूं." उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में इस फ़ैसले पर बहुत प्रतिक्रिया आ रही है. पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय कैदी सरबजीत सिंह के मामले में अंसार बर्नी ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान के राष्ट्रपति एक ताज़ा रहम की अपील भेजी है.