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कूल नहीं हॉट है ये

कूल नहीं हॉट है ये

मुंबई. 11 अप्रैल 2012

क्या सुपरकूल हैं हम


सचिन यार्डी की फिल्म 'क्या सुपरकूल हैं हम' के प्रोमो के साथ ही यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या अब भारत में भी सेक्स कॉमेडी के दिन आ गये हैं. दादा कोड़के को याद करने वाले मान रहे हैं कि सचिन यार्डी की यह फिल्म अब ऐसी दसवें दर्जे की फूहड़ कॉमेडी के लिये रास्ता खोलेगी.

रितेश देशमुख और तुषार कपूर की गाली-गलौच और द्विअर्थी संवादों से भरी फिल्म 'क्या सुपरकूल हैं हम' को लेकर रितेश देशमुख ने साफ किया है कि यह फिल्म परिवार के साथ बैठ कर देखने लायक नहीं है. लेकिन रितेश इस बात को नहीं स्वीकार करते कि यह फिल्म विदेशी फिल्मों की तर्ज पर बनी एक सेक्स कॉमेडी है.

दूसरी ओर फिल्म के निर्देशक सचिन यार्डी फिल्म के प्रोमो को लेकर बचकाना सा तर्क दे रहे हैं कि जब आप किसी फिल्म का सीक्वल बनाते हो तो उसमें हास्य पहले से भी ज्यादा होना चाहिए. शायद इसी वजह से कई लोगों को फिल्म के प्रोमो थोड़े आपत्तिजनक लग रहे हैं. इस फिल्म में रितेश देशमुख, तुषार कपूर, सारा जोंस और नेहा शर्मा ने काम किया है और फिल्म अगस्त तक परदे पर होगी.

सचिन यार्डी की सफाई है कि यह फिल्म का पागलपन है, जिसे सेक्स कॉमेडी कहा जा रहा है. मुझसे यह जानने की कोशिश हो रही है कि क्या इस फिल्म में सेक्स का इस्तेमाल हमने मार्केटिंग टूल के तौर पर किया है, लेकिन यह सच नहीं है. सचिन का कहना है कि यह विशुद्ध रुप से हास्य फिल्म है.

लेकिन सचिन से जब यह पूछा गया कि क्या वे इस फिल्म को परिवार के साथ बैठकर देखने लायक मानते हैं तो सचिन इस बात को लेकर अगल-बगल देखने लगे. जाहिर है, सचिन पर सेक्स को मार्केटिंग टूल के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप गलत नहीं है. लेकिन इसे स्वीकार करने का कलेजा सचिन यार्डी में नहीं है कि अब वे हास्य के बजाये घटिया तरीके से सेक्स परोसने वाली फिल्म बना रहे हैं.
 


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