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गुजरात जनसंहार में 18 को उम्रकैद

गुजरात जनसंहार में 18 को उम्रकैद

अहमदाबाद. 12 अप्रैल 2012 बीबीसी

गुजरात जनसंहार


गुजरात की एक विशेष अदालत ने ओड जनसंहार के मामले में जिन 23 लोगों को दोषी ठहराया था, उनमें से 18 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. जबकि पाँच लोगों को सात साल की कैद होगी.

मंगलवार को अदालत ने इस मामले में 23 लोगों को दोषी ठहराया था, जबकि 23 लोगों को रिहा कर दिया गया था. वर्ष 2002 में गुजरात दंगों के दौरान हुए इस नरसंहार के मामले में कुल 47 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था लेकिन एक व्यक्ति की मुक़दमे के दौरान मौत हो गई. दंगों के दौरान महिलाओं और बच्चों सहित अल्पसंख्यक समुदाय के 23 लोगों ने ओड गाँव में एक घर में पनाह ली थी. इस जगह को दंगाइयों ने घेर कर आग लगा दी थी.

आणंद के जिला और सत्र न्यायालय की न्यायाधीश पूनम सिंह ने 18 लोगों तो हत्या और आपराधिक षडयंत्र के लिए दोषी पाया और इन सभी लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई. इन सभी लोगों पर 5,800 रुपए का जु्र्माना भी लगाया गया है.

जबकि पाँच अन्य लोगों को हत्या के प्रयास और आपराधिक षडयंत्र का दोषी पाया है और सात वर्ष की सजा सुनाई है. इन सभी लोगों को 3,800 रुपए का जुर्माना भी अदा करना होगा. बचाव पक्ष के वकील अश्विन धगड ने कहा है कि इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी. उन्होंने कहा, "गवाहों के बयानों में विरोधाभास था. अदालत ने इन्हें किस तरह से स्वीकार किया है, यह फैसले की प्रति मिलने के बाद हम देखेंगे."

सरकारी वकील पीएम परमार ने कहा कि हालांकि उन्होंने हत्या के लिए दोषी लोगों के लिए मौत की सज़ा देने की गुजारिश की थी लेकिन अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है.

जैसे ही अदालत में सज़ा सुनाई गई, बाहर खड़े अभियु्क्तों के परिजनों के बीच शोर-शराबा शुरु हो गया. कई लोग सज़ा सुनने के बाद फूट-फूटकर रो पड़े. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार रिश्तेदारों ने कहा, "किसी के खिलाफ कोई सबूत नहीं है. ये अन्याय है." कुछ लोगों ने आरोप लगाया, "ये न्याय का मंदिर नहीं है बल्कि अन्याय का मंदिर है."

अदालत परिसर में एकत्रित सौ से अधिक लोग, जिनमें महिलाएँ और बच्चे शामिल थे, नारेबाजी करने लगे. इसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप करके उन्हें अदालत परिसर से बाहर निकाल दिया.

अदालत में दिए गए विवरण के अनुसार आणंद ज़िले के ओड के पीरावली भागोल में दंगों के दौरान पहली मार्च को मुसलमानों के एक छोटे समूह ने एक घर में पनाह ली थी. बताया गया है कि पनाह लेने वाले 23 लोगों में ज़्यादातर महिलाएँ और बच्चे थे. कोई 2000 लोगों की एक भीड़ ने इस घर में आग लगा दी थी, जिससे इन सभी की मौत हो गई थी.

गुजरात के कई अन्य मामलों की तरह इस मामले में भी गुजरात पुलिस की जाँच से असंतुष्ट होने के बाद पीड़ित परिवारों के अनुरोध पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जाँच का जिम्मा भी विशेष जाँच दल (एसआईटी) को सौंप दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने दंगों के दस मामलों की जाँच एसआईटी को सौंपी थी. ओड की घटना इनमें से एक है. एसआईटी की जाँच के आधार पर विशेष अदालत में 47 लोगों के ख़िलाफ़ हत्या, षडयंत्र, दंगे, ग़ैरक़ानूनी ढंग से भीड़ जमा करने, हत्या के प्रयास और सबूत मिटाने के आरोप लगाए गए थे.

इनमें से एक अभियुक्त की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई थी. इस मामले के अलावा ओड के ही एक और मामले की जाँच एसआईटी ने की है और इस दूसरे मामले में भी जल्द ही फैसला आने की संभावना है.


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