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तीस्ता मामले में मोदी सरकार को लताड़

तीस्ता मामले में मोदी सरकार को लताड़

नई दिल्ली. 13 अप्रैल 2012

तीस्ता सीतलवाड़


सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को फटकार लगाते हुये सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ गुजरात दंगों से संबंधित मामले में होने वाली कार्रवाई पर रोक लगाने के निर्देश दिये हैं. नरेंद्र मोदी की गुजरात सरकार द्वारा तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि वास्तव में मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए मुकदमा गुजरात सरकार के खिलाफ चलाया जाना चाहिए.

जस्टिस आफताब आलम और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की पीठ ने गुजरात सरकार के वकील से कठोर शब्दों में कहा- आप एफआईआर पढ़िए. आरोपी दूसरा पक्ष यानी राज्य सरकार होना चाहिए था. राज्य के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघनों का मुकदमा चलाया जाना चाहिए था.

अदालत ने कहा- हम बहुत असंतुष्ट हैं. मामला प्रशासन के खिलाफ बनता है. अगर समग्र दृष्टिकोण से देखा जाए, तो एफआईआर प्रशासन के खिलाफ होना चाहिए था. अदालत ने कहा- तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ यह गलत इरादे से बनाया हुआ मामला है.

गौरतलब है कि यह मामला लूनावाड़ा में दफन अज्ञात शवों को खोद कर निकाले जाने से जुड़ा हुआ है. पंचमहाल जिले के लूनावाड़ा में पनाम नदी की तलहटी के पास 28 अज्ञात शवों को कब्र से निकाल कर दावा किया गया था कि ये अज्ञात शव दंगों के बाद मारे गये लोगों के हैं. पंचमहाल जिले के पंधरवाड़ा के रहने वाले कुल 32 लोगों को 1 मार्च, 2002 को साम्प्रदायिक दंगों के दौरान मार डाला गया था. लेकिन इनमें से 28 शवों के बारे में पता नहीं चल पाया था.

बाद में गुजरात सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें यह कहते हुये आरोपी बनाया था कि उनके ही कहने पर 2002 के गुजरात दंगों में मारे गए लोगों के शव कब्रगाहों से खोद कर निकाले गये थे. यह घटना 27 दिसंबर 2005 को हुई थी.


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