पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >पश्चिम Print | Share This  

पार्थसारथी राय होने का मतलब

पार्थसारथी राय होने का मतलब

कोलकाता. 19 अप्रैल 2012 गंगानन्द झा

पार्थसारथी राय


पार्थसारथी राय अब जेल की चाहरदीवारी से बाहर हैं लेकिन उनके जेल में होने के कारणों को लेकर शुरु हुआ सवाल-जवाब का दौर थमता नज़र नहीं आ रहा. इधर पार्थसारथी राय ने जेल से बाहर आने के बाद एक बार फिर से अपनी लड़ाई को और मज़बूती से लड़ते रहने की प्रतिबद्धता दुहराई है.

आज का युवा दुनिया को बदलने का आभास देनेवाले सैद्धान्तिक बदलावों से उत्साहित नहीं हुआ करता. वह प्रारम्भ से ही बूढ़ा रहता है, अधिक भौतिक लक्ष्यों की उपलब्धि के लिए परिपक्व ढंग से अपने विकल्पों को तौलते हुए वे एक बार में, एक ही विषय पर सोचता है. जाहिर है, धन और उपभोग की सामग्री उसकी चिंता में सबसे उपर हैं. वे अपने जीवन में गुणात्मक परिवर्तन की आकांक्षा नहीं रखते, उन्हें अपने जीवन के तौर तरीकों में परिमाणात्मक बढ़ोत्तरी की अभिलाषा रहती है.

युवाओं की इस तस्वीर में पार्थसारथी राय बेमेल हैं. सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य एवं स्वीकृति का अश्वासन रहने के बावजूद 36 वर्ष की आयु का यह मेधावी अणु जीव वैज्ञानिक अपने सराहनीय शोध कार्य के साथ साथ समाज में शोषण के विरूद्ध निरलस प्रतिवाद यानी crusader के अभियान में लगा रहता है.

वे कोलकाता के इण्डियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एडुकेशन एण्ड रिसर्च में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. गत 8 अप्रैल को उन्हें पूर्व कोलकाता में एक बेदखली अभियान में बाधा पहुँचाने के अभियोग में पुलिस ने गिरफ्तार किया. एक सप्ताह के बाद जमानत पर रिहा किया गया है. उनको जाननेवालों का कहना है कि यह गिरफ्तारी सम्भावनामय राष्ट्रीय सम्पदा के साथ छेड़छाड़ करने जैसा कृत्य है.

उनके व्यक्तित्व के दो भिन्न पहलुओं के कारण उनकी गिरफ्तारी से अन्तर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय एवं देश में उनके प्रशंसकों के बीच काफी उत्तेजना फैली. गिरफ्तारी के विरोध में उनके समर्थकों ने इंटरनेट के सोशल नेटवर्किंग साइटों पर ब्लॉग और पोस्ट के जरिए प्रतिवाद जाहिर किया है.

शैक्षणिक धरातल पर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बंगलोर के माइक्रोबायलॉजी एण्ड सेल बायलॉजी विभाग से उन्होंने पीएच.डी.की उपाधि हासिल की है. संयुक्त राज्य अमेरिका के क्लिवलैंड क्लिनिक, ओहायो अवस्थित लेमर रिसर्च इंस्टिट्यूट के सेल बायलॉजी विभाग में पोस्टडॉक्टोरल फेलो हैं. उनके लिखे गए कई एक लेख नए आयाम उद्घाटित करनेवाले बताए गए हैं.

उनके काम के लिए दुनिया भर के कई एक विश्वविद्यालयों ने उन्हें सम्मानित किया है. इनमें बंगलोर के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, माइक्रोबायलॉजी एण्ड सेल बायलॉजी विभाग से सर्वोत्तम पीएच.डी थिसीस के लिए श्रीनिवास स्वर्ण पदक, 2004-05, वेलकम ट्रस्ट-डीबीटी इंडिया एलायंस इंटरमिडियट फेलोशिप, 2010, इंडियन ऐकैडेमी ऑफ साइंसेस, 2010 और क्वांटिटेटिव बायलॉजी पर कोल्ड स्प्रिंग हार्बर सिम्पोजियम, 2009 में फेलोशिप लेक्चर एवार्ड, जहाँ चर्चा का विषय था ‘Evolution: The molecular landscape’. वे पूर्वी भारत में कैन्सर पर एक शोध प्रकल्प के अध्यक्ष हैं.

पार्थसारथी राय ने शोषण के खिलाफ अनेको प्रदर्शनों में भागीदारी की है, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल के द्वारा आयोजित रहे हों. सन 1991 ई से वे विभिन्न आन्दोलनों का समर्थन करते रहे हैं और इस सिलसिले में वे लालगंज, असम, एवं ओडिसा गए, जहाँ भी उन्हें शोषण के विरुद्ध प्रतिवाद को समर्थन देने की जरूरत महसूस हुई.

पॉस्को आन्दोलन के समय वे विस्थापित लोगों के समर्थन में ओडिसा में थे तथा असम के कृषक मुक्ति संग्राम समिति की ओर से आयोजित बाँध विरोधी आन्दोलन में भी उन्होंने भागीदारी की थी. जबकि पुलिस का कहना है कि वे माओवादी समूहों से सम्बद्ध हैं.

उनके जाननेवालों का कहना है कि वे न तो वामपंथी हैं न ही दक्षिणपंथी. पार्थसारथी किसी भी औसत विवेकशील व्यक्ति की तरह किसी गलत बात का प्रतिवाद करते हैं.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

श्वेत व्रत झा [shwetbrata@gmail.com] बी. देवघर, झारखण्ड | - 2012-04-28 12:08:44

 
  जब कोई सामने न आता हो तो एक संवेदनशील व्यक्ति अन्याय के खिलाफ बिगुल फुकता है, दृष्टान्त बनता है, और समाज अपना नायक को तलाश करने की उत्कंठा पेश करता है|हमारा भारतीय समाज को हर क्षेत्र में महानायक की आवश्यकता है | अगर इस वैज्ञानिक में बदलाव लाने की संभावनाएं दिखती हैं तो हमें इन्हें हाथों हाथ लेना चाहिये|  
   
 

Shachindra Nath Jha [] Jamshedpur, Tatanagar - 2012-04-20 07:44:07

 
  ये बात बिलकुल सही है कि आज की युवा पीढ़ी अपने अगल बगल होने वाली घटनाओं के प्रति असंवेदनशील हो चुके हैं, उन्हें किसी चीज की चिंता है तो वो है कैसे अपने भौतिक सुखों को बढ़ाएं, और इसी क्रम में सभी भेड़ चाल में ज्यादातर चल रहे हैं, इसके पीछे सबसे बड़ा डर रहता है दूसरों से पीछे कहीं न छूट जाएँ | अपने को कैसे गुणात्मक रूप से आगे बढ़ाएं नहीं | इन सब के पीछे सिर्फ और सिर्फ बाजारवाद का हाथ है | 
   
सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in