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गिलानी को सुप्रीम कोर्ट से सजा

गिलानी को सुप्रीम कोर्ट से सजा

इस्लामाबाद. 26 अप्रैल 2012

यूसुफ रजा गिलानी


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को गुरुवार को पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी करार देते हुये बेंच की कार्यवाही पूरी होने तक के लिए सजा सुनाई. गिलानी को संविधान के अनुच्छेद 63(1)(जी) के तहत दोषी करार दिया गया. इस सजा के बाद वे प्रधानमंत्री पद पर कानूनन बने रहने के हकदार नहीं हैं लेकिन अदालत की कार्यवाही खत्म होते ही अदालत से टले यूसुफ रजा गिलानी ने कहा कि वे इस्तीफा नहीं देंगे.

गौरतलब है कि पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय खंडपीठ ने प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को 13 फरवरी को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था. अदालत ने कहा था कि गिलानी ने कोर्ट की अवमानना की है.

गिलानी पर आरोप है कि जनरल परवेज मुशर्रफ ने राष्ट्रपति रहते हुये अक्टूबर 2007 में नेशनल रिकंसिलिएशन आर्डिनेंस यानी एनआरओ के तहत हत्या और भ्रष्टाचार का मामला झेल रहे राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों को आम माफी दे दी थी. इस माफी का लाभ वर्तमान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और गृह मंत्री रहमान मलिक समेत कम से कम 8 हजार लोगों को मिला था.

इसके बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता डॉ. मुबासर हसन और वरिष्ठ वकील एम. असलम खाकी ने पाकिस्तान उच्च न्यायालय में याचिका दायर करते हुये कहा कि राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश पूरी तरह से गैर कानूनी है. इसके बाद 2009 में उच्चतम न्यायालय ने एनआरओ को असंवैधानिक करार दिया. इसके बाद से ही आसिफ अली जरदारी के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव अदालत ने बनाया लेकिन प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी ने जरदारी समेत दूसरे राजनेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. उच्चतम न्यायालय का कहना था कि गिलानी स्विस अधिकारियों को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ मनी लांड्रिंग के मामले फिर से खोलने के लिए पत्र लिखें लेकिन गिलानी ने इसका भी पालन नहीं किया. इस पर अदालत ने गिलानी को कड़ी चेतावनी दी थी.

इस मामले में पाकिस्तान उच्चतम न्यायालय की 17 सदस्यीय पूर्ण पीठ ने प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी को अदालत की अवमानना के लिये जिम्मेवार ठहराते हुये उन्हें 19 जनवरी को स्वयं अदालत के सामने पेश होने का आदेश दिया था. जिसके बाद अदालत में पेश हो कर उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है. जिसके बाद अदालत ने माना कि गिलानी अदालत की अवमानना के दोषी हैं.


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