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बाघ को गाय ने मार डाला

बाघ को गाय ने मार डाला

कोयम्बटूर. 29 अप्रैल 2012

बाघ

 

आपने ठीक पढ़ा- बाघ को गाय ने मार डाला. तमिलनाडु के कोयम्बटूर के वालपराई में हुई इस अविश्वसनीय घटना में एक बाघ गाय के बाड़े में घुस गया लेकिन गाय का शिकार करने के बजाये वह खुद ही शिकार हो गया. अपनी नुकीली सिंग से गाय ने बाघ को इस कदर घायल कर दिया कि बाघ की अगले दिन मौत हो गयी. वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि बाघ पहले से घायल रहा होगा, जिसके कारण गाय ने उसे मौत के कगार पर पहुंचा दिया.

वालपराई के पेरियार नगर इलाके में रहने वाले आर ज्ञानशेखरन मूलतः चाय की खेती करते हैं. गुरुवार की रात उन्हें अपने गाय के बाड़े में कुछ हलचल सुनाई पड़ी लेकिन ज्ञानशेखरन को लगा कि उन्हें वहम है. लेकिन शुक्रवार की सुबह जब वे अपने गाय के बाड़े में पहुंचे तो उनके होश उड़ गये. गाय के बाड़े में एक बाघ मरणासन्न हालत में पड़ा हुआ दहाड़ रहा था.

ज्ञानशेखरन ने इसकी सूचना वन विभाग को दी. वन विभाग का अमला जब गांव में पहुंचा तो हमेशा की तरह उसके पास इसकी तैयारी नहीं थी कि घायल बाघ को पकड़ा जा सके या उसे किसी भी तरह की चिकित्सा सुविधा दी जा सके. इस तरह पूरा दिन निकल गया. मन्नामलाई वन क्षेत्र के रेंडर अरोकियाराज ज़ेवियर के अनुसार मुदुमलाई नेशनल पार्क के वन जीव चिकित्सक डाक्टर एन कलाईवेनन ने बाघ को बेहोश करके उसे काबू किया. लेकिन शाम के बाद जब घायल बाघ को पड़ोसी जिले के पशु चिकित्सालय में ले जाया गया, तब तक बाघ को बचाने की हर कोशिश नाकाम हो चुकी थी. शनिवार की सुबह 10 साल के इस बाघ ने दम तोड़ दिया.

बाघ का पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों का कहना है कि बाघ ने शाही का शिकार किया था, जिसके कारण वह पहले से ही घायल हो गया था. बाद में गाय और उसके बछड़े को आसान शिकार मान कर घायलावस्था में बाड़े में जाना उसके लिये घातक सिद्ध हुआ. पहले से ही घायल और परेशान बाघ को गाय ने अपनी सींग से मार कर और घायल कर दिया. हालांकि वन जीव प्रेमियों का आरोप है कि अगर बाघ को समय पर चिकित्सा सुविधा, यहां तक कि पानी और भोजन भी मिल जाता तो उसके बचने की कोई गुंजाइश हो सकती थी.


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