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कलेक्टर की रिहाई अभी नहीं

कलेक्टर की रिहाई अभी नहीं

सुकमा. 29 अप्रैल 2012

एलेक्स पॉल मेनन

 

छत्तीसगढ़ के सुकमा के अपह्रत कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन से मध्यस्थों की मुलाकात नहीं हो सकी. नक्सलियों की ओर से बनाये गये मध्यस्थ ब्रह्मदेव शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल एक रात नक्सलियों से मुलाकात के बाद चिंतलनार लौट आए हैं. उन्होंने माना कि नक्सलियों ने उनकी मुलाकात एलेक्स पॉल मेनन से नहीं कराई लेकिन नक्सलियों ने उनके स्वस्थ होने की बात कही है. मध्यस्थों की बातचीत से यह संकेत मिले हैं कि फिलहाल कलेक्टर की रिहाई का मामला लंबा जाएगा.

गौरतलब है कि सुकमा के कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन का नक्सलियों ने उस समय अपहरण कर लिया था, जब वे घोर नक्सलग्रस्त इलाके में अपने दो गार्ड के साथ बैठक कर रहे थे. नक्सलियों ने उनके दोनों गार्डों की हत्या कर दी थी और उसके बाद कलेक्टर को अपने साथ लेकर चले गये थे. बाद में नक्सलियों ने अलेक्स पॉल मेनन की रिहाई के लिये अपने आठ साथियों की रिहाई की मांग की है. इसके अलावा ओडीशा की तर्ज पर नक्सलियों ने कहा था कि सरकार ऑपरेशन ग्रीन हंट बंद करे और दंतेवाड़ा व राजधानी रायपुर की जेल में बंद निर्दोष लोगों को भी रिहा करे. बाद में नक्सलियों ने अपनी मांग बढ़ाते हुये 70 से अधिक नक्सलियों को छोड़ने की बात की.

माओवादियों ने बीडी शर्मा, प्रशांत भूषण और सुकमा के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम को अपना मध्यस्थ बनाया था, जिसमें से प्रशांत भूषण और मनीष कुंजाम ने मध्यस्थता से इंकार कर दिया था. इसके बाद मध्यस्थों में नया नाम प्रोफेसर हरगोपाल का जुड़ा. प्रोफेसर हरगोपाल और बीडी शर्मा शनिवार को नक्सलियों से बातचीत करने ताड़मेटला के जंगलों में गये थे. जहां से रविवार को उनकी वापसी हो पाई.

अपनी वापसी के बाद ब्रह्मदेव शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल ने कहा कि उनकी मुलाकात अपह्रत कलेक्टर अलेक्स पॉल मेनन से नहीं हो पाई है. लेकिन दोनों मध्यस्थों का कहना था कि नक्सलियों ने मेनन के स्वस्थ होने की बात कही है. हालांकि दोनों मध्यस्थों ने जो संकेत दिये, उससे यह बाद साफ हो गई कि सरकार और माओवादी एक-दूसरे की मांगों से सहमत नहीं हैं और बहुत जल्दी कलेक्टर की रिहाई संभव नहीं है.